भारत विकास परिषद नाहन शाखा ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर उठाई मांग
बोले, खड़कहां में सदियों से हो रहा विशिष्ट प्रकार की पांडुलिपि आधारित विद्या का संरक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। भारत विकास परिषद नाहन शाखा के अध्यक्ष लायक राम भारद्वाज शास्त्री ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर जिला के खड़कहां में प्राचीन पांडुलिपियों पर आधारित सांचा विद्या, ज्योतिष और वैदिक कर्मकांड प्रशिक्षण केंद्र (गुरुकुल) स्थापित करने की मांग उठाई है।
उन्होंने बताया कि उप-तहसील रोनाहट के अंतर्गत आने वाला खड़कहां गांव ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहां सदियों से विशिष्ट प्रकार की पांडुलिपि आधारित विद्या का संरक्षण हो रहा है। इस विद्या को स्थानीय भाषा में भटकक्षरी कश्मीरी विद्या कहते हैं। इसे पाबूची लिपि के नाम से भी जाना जाता है।
उन्होंने बताया कि इस लिपि की वर्णमाला, लेखन शैली और अध्ययन पद्धति सामान्य लिपियों से भिन्न और विशिष्ट है। इसके माध्यम से ज्योतिष, वैदिक कर्मकांड, धार्मिक अनुष्ठानों और पारंपरिक ज्ञान का अध्ययन व संरक्षण किया जाता रहा है। यह विद्या केवल खड़कहां तक सीमित नहीं रही, बल्कि लंबे समय से सिरमौर और शिमला जिलों के साथ-साथ उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र में भी प्रचलित रही है।
भारद्वाज ने बताया कि इस ज्ञान परंपरा के प्रमुख संरक्षक मुख्य रूप से जिला शिमला के धार चांदना और जिला सिरमौर के ग्राम खड़कहां में हैं। गत 25 से 27 फरवरी तक ग्राम खड़कहां में संगोष्ठी हुई, जिसमें इस प्राचीन विद्या से संबंधित कई दुर्लभ पांडुलिपियों का अवलोकन और अध्ययन किया गया।
उन्होंने कहा कि अध्ययन के दौरान यह सामने आया कि कई पांडुलिपियां लगभग एक हजार वर्ष से भी अधिक प्राचीन हैं। इनमें ज्योतिष, धार्मिक अनुष्ठानों और पारंपरिक ज्ञान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के प्रभाव और बदलती सामाजिक परिस्थितियों के कारण इस विद्या के जानकार धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं, जिससे इसके लुप्त होने का खतरा बढ़ रहा है। ऐसे में इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए संस्थागत स्तर पर प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने मांग की कि खड़कहां में प्राचीन पांडुलिपि आधारित सांचा विद्या, ज्योतिष और वैदिक कर्मकांड प्रशिक्षण केंद्र अथवा गुरुकुल स्थापित किया जाए।