हिमाचल प्रदेश सीमा पर स्थित आसन बैराज हुआ जल पक्षियों से गुलजार
पहुंची 47 प्रजातियों के 5700 पक्षियों में से 25 विदेशी प्रजातियां शामिल
पक्षी विशेषज्ञ टीम की ओर से फरवरी माह में होगी अंतिम गणना : डीआर कुकरेती
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। हिमाचल सीमा पर स्थित आसन बैराज में लगातार देश-विदेश से पहुंचने वाले पक्षियोंं की संख्या में इजाफा हो रहा है। कुल 5700 से अधिक जल पक्षियों ने डेरा डाला है। खास बात ये है कि इस बार पहुंचे कुल 47 में से 25 विदेशी जल पक्षियों की प्रजातियां शामिल हैं। ये रंग-बिरंगे परिंदे बैराज में है जो खूब आकर्षण का केंद्र बनते जा रहे हैं। आसन बैराज में देश व विदेश से पहुंच चुके जल पक्षी की सुरक्षा को उत्तराखंड वन विभाग के दर्जनोंं प्रशिक्षु दिन-रात नजर रख रहे हैं।
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल के जल पक्षी प्रेमियों हिमेंद्र ठाकुर, प्रद्युमन असवाल, ऋतिक तोमर, हरविंद्र कौर, रविना शर्मा, प्रदीप चौहान, सुरेंद्र भारद्वाज, अनिल अत्री, रेखा व सविता ने बताया कि आसन वैटलैंड सर्दियों में खास आकर्षण का केंद्र रहता है। देश-विदेशों से पहुंचने वाले हजारों प्रजातियों के रंग-बिरंगे जल परिंदों की अटखेलियां सबका मन मोह लेती हैं। नवंबर माह प्रथम सप्ताह से आसन वैटलैंड बैराज पर जल पक्षियों का आगमन शुरू होकर हर वर्ष मार्च माह तक रहता है। हिमाचल-उत्तराखंड सीमा(पांवटा से 5 किमी. दूर) पर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित स्थल आसन बैराज देश के चर्चित वैटलैंड में से एक है। इसमें सुर्खाव पक्षियों की संख्या सबसे अधिक रहती है। नवंबर तक आसन बैराज झील में 3800 मेहमान पक्षी पहुंचे थे। स्थानीय पक्षी विशेषज्ञ प्रदीप सक्सेना समेत वन कर्मियों के अनुसार जिनकी संंख्या अब 5700 से अधिक हो चुकी है। आसन झील की सुंदरता को विभिन्न रंगों से जल पक्षी इन दिनों चार चांद लगा रहे हैं। इन पक्षियों का वैटलैंड में कलरव, आसपास उड़ कर वापस झील में लौटना पर्यटकों को खूब आकर्षित कर रहा है।
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फरवरी में पक्षी विशेषज्ञ टीम करेगी फाइनल गणना : कुकरेती
- आरओ आसन बैराज उत्तराखंड डीआर कुकरेती ने बताया कि देश-विदेश के करीब 52 जल पक्षी प्रजातियों सर्दियों में यहां पहुंचती है। इस बार 47 प्रजातियों के करीब 5700 जल पक्षी डेरा डाल चुके हैं। इसमें 25 विदेशी प्रजातियां शामिल हैं। विभिन्न प्रजातियों में कोमन कूट, गैंडवाल, ग्रेलक गूंज, रुडी सलडेक, वार हैडिक गुंज, स्पोट विलडक शामिल हैं। हर वर्ष की भांति फरवरी माह में पक्षी विशेषज्ञ टीम अंतिम गणना करेगी। तब तक छह हजार से अधिक संख्या पहुंचने के कयास लगाए जा रहे हैं। अधिकतर जल पक्षी गर्मियां शुरू होने पर मार्च माह में वापस अपने देश व प्रदेश लौट जाते हैं। हिमाचल-उत्तराखंड की सीमा पर स्थित आसन बैराज में मोटर बोट बंद है। नौकायान को झील में स्थल चिह्नित है। पक्षियों की सुरक्षा को दर्जनों प्रशिक्षु वन कर्मियों की ओर से दिन व रात के समय पहरा दिया जाता है।
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