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Sirmour News: सरकारें बदलती रहीं, लेकिन एक कमरे से बाहर नहीं निकल सकी पाठशाला

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(शिक्षा के हाल)ग्राम पंचायत भुगरनी के प्रधान तेजेंद्र सिंह सहोता
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(शिक्षा का सच)
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-आज भी सरकार, शिक्षा विभाग और नेताओं की नजरें इनायत को तरस रही प्राथमिक पाठशाला भुंगरनी
-एक छोटे से कमरे में लग रही पांच कक्षाएं, मिड-डे मिल किचन, स्टोर और कार्यालय हो रहा संचालित

सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। हिमाचल प्रदेश सरकार शिक्षा और मूलभूत सुविधाएं देने के बड़े-बड़े दावे करती रही है लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट में कुछ और ही दृश्य नजर आ रहे हैं। पांवटा साहिब विधानसभा की भुंगरनी प्राथमिक पाठशाला पिछले 14 वर्षों से एक सोसायटी के माध्यम से मिले छोटे से कमरे में चल रहा है। इसी में मध्याह्न भोजन किचन (सिलिंडर), स्टोर रूम, स्टाफ रूम के साथ सभी पांच कक्षाएं संचालित होती हैं। आलम ये है कि स्कूली बच्चे अगर अपने स्कूल बैग भीतर ले जाते हैं तो फिर खुद के बैठने के लिए जगह ही नहीं बचती हैं।

बता दें कि वर्ष 2012 में भुंगरनी गांव में प्राथमिक पाठशाला खोली गई। इस गांव के लोगों और कंपनियों में काम करने वाले प्रवासी परिवारों के बच्चों को समीप ही शिक्षा ग्रहण करने की सुविधा मिल गई। शुरू में समाजसेवी गुरमीत सिंह ने अपने घर में एक कमरा दिया। पांच वर्षों तक कक्षाएं संचालित होती रहीं। इसके बाद द भुंगरनी सोसायटी ने कुछ समय के लिए एक छोटा सा कमरा (दस बाय सतरा फुट) का निशुल्क स्कूल संचालन को दिया। प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस की सरकार आती-जाती रहीं लेकिन इस स्कूल की कोई सुध नहीं ली जा रही है।
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सोसायटी भी कमरे में अपना कार्यालय या स्टोर संचालन करना चाहती है। शिक्षा विभाग को कहीं अन्य जगह भूमि या भवन देखने का आग्रह कर चुकी है। हैरानी की बात है कि सरकार, शिक्षा विभाग और स्थानीय पंचायत अब तक भी इस स्कूल का अपना भवन तैयार करने में सफल नहीं हो सकी है। कांग्रेस तथा भाजपा दोनों सरकारों ने अनदेखी की है। शिक्षा के क्षेत्र में बड़े-बड़े दावों की जमीनी हकीकत कुछ अलग ही है।
एसएमसी कमेटी के प्रधान जसपाल सिंह ने बताया कि अपना भवन नहीं होने से काफी दिक्कतें पेश आ रही हैं। स्कूल में दो शिक्षक, मध्याह्न भोजन कर्मी और चपरासी तैनात हैं। 20 बच्चे शिक्षारत हैं। भवन होने पर बच्चों की संख्या काफी बढ़ सकती है। दो वर्ष पहले खाद्य आपूर्ति निगम की इस पंचायत में भूमि से कुछ स्कूल को देने का आग्रह भी किया गया। पंचायत घर भवन को भूमि दे दी, लेकिन स्कूल को भूमि नहीं मिल सकी।
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विभाग को भेजी रिपोर्ट : चौहान
भुंगरनी स्कूल के प्रभारी बलबीर सिंह चौहान ने बताया कि स्कूल के पास न तो अपनी जमीन है, न ही अपना भवन है। एसएमसी के माध्यम से कई बार मुद्दा उठाया गया है। पांवटा साहिब शिक्षा खंड कार्यालय और उप कक्षा निदेशक को दिक्कतों के बारे में रिपोर्ट भेज कर अवगत करवाया गया है।
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समाधान को हर संभव प्रयास होगा : प्रधान
भुंगरनी ग्राम पंचायत के नवनिर्वाचित प्रधान तेजेंद्र सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग के समक्ष मुद्दा उठाया जाएगा। प्राथमिक पाठशाला भवन को भूमि तलाशने का हर संभव प्रयास होगा।
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स्कूल के पास अपना भवन होना जरूरी : गुरमीत सिंह मन्नी
ग्राम पंचायत के उपप्रधान और समाजसेवी गुरमीत सिंह मन्नी ने बताया कि स्कूल शुरू करने के दौरान करीब पांच वर्षों तक एक कमरा अपने घर में दिया। अब सोसायटी के छोटे से कमरे में स्कूल चल रहा है। ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों के माध्यम से भी स्कूल को भूमि उपलब्ध करवाने के प्रयास होंगे।
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