श्रीमद्भागवत कथा में पूरे सप्ताह भर भक्ति के सागर में डूबी रही गुरु की नगरी
अंतिम दिन कभी भक्तों की आश्रूधारा बही तो कभी प्रफुल्लित होकर झूमते दिखे
फूल बरसा कर कथा वाचिका देवी चित्रकला को भक्तों ने किया शहर से विदा
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। पावटा साहिब नगर परिषद खेल मैदान में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का बुधवार को समापन हुआ। भागवत कथा में चार वेद, पुराण, गीता एवं श्रीमद्भागवत महापुराण की व्याख्या को अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक देवी चित्रलेखा के मुखारविंद से उपस्थित भक्तों ने श्रवण किया।
कथा के दौरान जनआस्था का ऐसा सैलाब उमड़त्ता रहा कि आस्था के सरोवर में भक्तों की डूबकी की गुरु की नगरी भी साक्षात गवाह बन गई। सप्ताह भर चले श्रीमद्भागवत कथा और सत्संग महोत्सव के दौरान भव्य मंच, आकर्षक सजावट और भक्तिमय माहौल श्रद्धालुओं को एक अलौकिक आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करता रहा।
विगत सात दिनों तक भगवान श्री कृष्ण जी के वात्सल्य प्रेम, असीम प्रेम के अलावा उनके द्वारा किए गए विभिन्न लीलाओं का वर्णन किया गया। वर्तमान समय में समाज में व्याप्त अत्याचार, अनाचार, कटुता, व्यभिचार को दूर कर सुंदर समाज निर्माण के लिए युवाओं को प्रेरित किया।
इस दौरान अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक देवी चित्रलेखा के भजन गायन ने उपस्थित हजारों लोगों को ताल एवं धुन पर नृत्य करने के लिए विवश कर दिया। कथा वाचक देवी चित्रलेखा ने कहा कि सुंदर समाज निर्माण के लिए जो काम प्रेम के माध्यम से संभव है, वह हिंसा से संभव नहीं हो सकता है। समाज में कुछ लोग ही अच्छे कर्मों द्वारा सदैव चिर स्मरणीय होते हैं, इतिहास इसका साक्षी है। लोगों ने सप्ताह भर इस संगीतमयी भागवत कथा का आनंद उठाया।
आयोजक श्री श्याम सखा मंडल पांवटा साहिब के सदस्यों अरविंद बंसल, मयंक महावर, अतुल गुप्ता, गौरव खापडा, अंकित गुप्ता, अमित गोयल, रजनीश गुप्ता, अजय संसरवाल व रोहित सिंघल ने बताया कि देवी चित्रलेखा ने अपनी मधुर वाणी और भक्तिमय प्रवचनों से लोगों को भक्तिरस से निहाल किया। सात दिवसीय भागवत कथा में शहर के साथ आसपास गांवों के अलावा दूरदराज से काफी संख्या में पहुंचे महिला-पुरूष भक्तों ने इस कथा का आनंद उठाया। सात दिनों तक इस कथा में पूरा वातावरण भक्तिमय रहा। बुधवार को भागवत कथा और सामूहिक विवाह के बाद श्री श्याम सखा मंडल पांवटा साहिब कमेटी के द्वारा उपस्थित भक्तों के बीच प्रसाद वितरण किया गया।
इस दौरान राज्यसभा सांसद व भाजपा प्रदेश महामंत्री सिकंदर कुमार, भाजपा प्रदेश सचिव तिलकराज और स्थानीय विधायक सुखराम चौधरी मौजूद रहे।
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सुदामा और राधा कृष्ण के व्याख्यान के दौरान अश्रूधारा
- श्रीमद्भागवत कथा धार्मिक अनुष्ठान के अंतिम दिन देवी चित्रलेखा की ओर से भगवान कृष्ण की सर्वोपरि लीला श्री रासलीला, मथुरा गमन, दुष्ट कंस राजा के अत्याचार से मुक्ति के लिए कंस वध, कुब्जा उद्धार, शिशुपाल वध, रासलीला, बाबरी गोपी व कृष्ण संवाद, राधा के विरह की वेदना, चाहे नियरे रखो चाहे दूर रखो, हम तुम्हारे है, रुक्मिणी विवाह, राजा परीक्षित की मृत्यु , सुदामा चरित्र से मित्रता का वर्णन कर लोगों को भक्ति रस में डूबो दिया।
संवाद