परशुराम जयंती पर रेणुका नहीं आएंगे आराध्य देवता परशुराम
निमंत्रण भेजा लेकिन शांतवास को छोड़कर नहीं आएंगे बाहर
हर साल अक्षय तृतीया पर श्री रेणुका जी में आते थे दो देवता
इस बार अक्षय तृतीया पर टूटने जा रही है सदियों पुरानी परंपरा
योगेंद्र अग्रवाल
ददाहू (सिरमौर)। अक्षय तृतीया पर सदियों पुरानी परंपरा टूटने जा रही है। क्षेत्र के आराध्य देव भगवान परशुराम इस बार श्री रेणुकाजी नहीं आएंगे। इससे परशुराम जयंती के मौके पर रेणुकाजी तीर्थ में श्रद्धालुओं को मुख्य देवता के दर्शन नहीं होंगे।
इस बार कटाह मंदिर के एकमात्र देवता ही शोभायात्रा में शामिल होंगे। जबकि हर साल भगवान परशुराम जयंती समारोह के मौके पर दो देवता यहां अपनी हाजिरी भरते थे। इनमें भगवान परशुराम की जन्म स्थली जामू व कटाह मंदिर के देवता शामिल हैं।
बता दें कि रेणुका विकास बोर्ड ने दोनों देवताओं को परशुराम जयंती में आने का विधिवत निमंत्रण भेज भी दिया है लेकिन जामू मंदिर के मुख्य देवता शोभायात्रा में शिरकत नहीं करेंगे। जामू मंदिर के मुख्य देवता और आराध्य देव इन दिनों शांत वास मेंं हैं जिस कारण वह अपने शांत वास को तोड़कर बाहर नहीं आएंगे।
दरअसल, भगवान परशुराम मंदिर जामू का जीर्णोद्धार होने के कारण देवताओं को सिंहासन सहित एक सुरक्षित स्थान पर शांत वास में विराजमान किया गया है। जहां से देवता बाहर नहीं आएंगे और शोभायात्रा में भी शिरकत नहीं करेंगे।
भगवान परशुराम मंदिर जामू के मुख्य राजदार व नंबरदार बिरेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि देवता ने अपनी गर्णी (खेल) में स्वयं यह ऐलान किया है कि वह मंदिर के जीर्णोद्धार (निर्माण) तक शांत वास में निवास करेंगे। इस बीच वह श्रद्धालुओं के बीच और उनके दर्शनों के लिए नहीं आएंगे।
उन्होंने बताया कि देवता ने यह भी स्वयं कहा कि रेणुकाजी में वह अदृश्य रूप में सर्वत्र विराजमान होकर श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। कटाह से आने वाले देवता में भी उन्हीं का ही अंश (स्वरूप) है। रेणुका पहुंचकर श्रद्धालु उनके दर्शनों का लाभ उठा सकेंगे।
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शोभायात्रा में एक देवता ही भरेंगे हाजिरी
- जामू मंदिर के आराध्य देव भगवान परशुराम के शोभायात्रा में शामिल नहीं होने की सूचना मिली है। वर्तमान समय में देवता शांत वास कर रहे हैं। इस कारण उनका बाहर निकलना वर्जित है। उन्होंने खुद ही इसका ऐलान किया है। परशुराम जयंती समारोह में कटाह के एकमात्र देवता ही शामिल होंगे।
- भरत सिंह ठाकुर, सीईओ, श्री रेणुकाजी विकास बोर्ड।
-संवाद