उत्तराखंड राज्य सीमा पर प्रसिद्ध आसन वेट लैंड में जल पक्षियों की अटखेलियां आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। देश-विदेश से पहुंच रहे परिंदों की संख्या छह हजार के पार हो गई है। जल पक्षी सुर्खाब समेत दर्जनों किस्म के रंग-बिरंगे जल पक्षी पर्यटकों को अपनी तरफ खींच रहे हैं। मेहमान परिंदों को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए आसन में मोटर बोट को बंद कर दिया है।
वन विभाग की टीम आसपास के क्षेत्र में शिकारियों से पक्षियों को बचाने के लिए रात को भी पहरा दे रहे हैं। बैराज झील पर्यटकों को इन दिनों खूब लुभा रही है। जल पक्षियों का कलरव खूब गूंज रहा है। बैराज का नजारा मन मोहने वाला है। हिमाचल-उत्तराखंड अंतर्राज्यीय सीमा पर यमुना नदी के साथ लगता आसान वेट लैंड संरक्षण आरक्षण क्षेत्र हैं। हिमाचल के पांवटा से मात्र छह किमी दूर आसन वेट लैंड, करीब 20 हेक्टेयर भूमि पर फैला है।
आसन वन आरक्षित क्षेत्र के आरओ जेएस तोमर ने कहा कि जल पक्षियों की संख्या छह हजार पार कर गई है। दिन और रात्रि के समय गश्त कर जल परिंदों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। बैराज में मोटर बोट चलाना बंद किया गया है।
इन सुंदर जल पक्षियों ने जमाया डेरा
आसन बैराज में पहुंचे जल पक्षियों में सुर्खाब, मेलार्ड, लार्ज कोरमोंरट, टिक्कड़ी, नील बतख, बेजूर, डूबकीमार बतख, बढ़ी-छोटी मुरगाबी, पिनटेल्स, छोटी कारमोरेंटस, हेरानस, डुबडुबी, कामन पोचार्ड, गेडवेल, नार्दन शावलर, कामन मोरगन, ग्रेट इगरेल, इंडियन पोंड हीरान, गेडवाल, वुडबिकर, किंगफिशर, कामन क्रूट और पियारून आदि शामिल हैं।