कृप्या पक्ष न काटे, पूरा ही लगाएं.. टिब्यूनल अध्यक्ष का..
अंजुमन इस्लामिया नाहन की समानांतर इकाई के गठन पर उठे सवालिया निशान
नाहन के महबूब अली ने उनका प्रधान पद का फार्म गायब करने का लगाया आरोप
बोले, मैं भी था उम्मीदवार, कहां गया मेरा फार्म, ट्रिब्यूनल अध्यक्ष को भेजा पत्र
चुनाव प्रक्रिया रद्द करने की मांग, चुनावों में लोकतंत्र का गला घोटने की कही बात
पंकज तन्हा
नाहन (सिरमौर)। अंजुमन इस्लामिया नाहन के समानांतर गठित हुई नई कार्यकारिणी के गठन पर अंजुमन इस्लामिया के सदस्य महबूब अली ने सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि प्रधान पद के चुनाव के लिए उन्होंने भी फार्म भरा था और ट्रिब्यूनल के सदस्यों को दिया था। उनका फार्म गायब करके प्रधान पद के लिए दो ही उम्मीदवार दिखाए गए और नया प्रधान भी चुन लिया गया।
उनका आरोप है कि ऐसा करके चुनावों में लोकतंत्र का गला घोटा गया है। उन्होंने चुनाव ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष से चुनाव को रद्द करने की मांग की है।
महबूब अली ने अपने आरोपों को लेकर ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता शकील अहमद शेख को भी पत्र भेजा है। उनको भेजे पत्र में महबूब अली ने कहा कि अंजुमन इस्लामिया के प्रधान पद के चुनाव में धांधली हुई है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने वर्तमान प्रधान बॉबी अहमद को हटाने के लिए 8 सितंबर को चुनाव ट्रिब्यूनल गठित किया था।
उन्होंने कहा कि दो दिन पहले 6 अक्तूबर को उन्हें अखबार के माध्यम से पता चला कि ट्रिब्यूनल ने एक उम्मीदवार को निर्विरोध अध्यक्ष चुन लिया है। हैरानी की बात यह है कि ट्रिब्यूनल को उन्होंने भी प्रधान पद के लिए अपना फार्म भरकर दिया था। यह फार्म 30 सितंबर को हरिपुर मस्जिद में हाजी इस्लाम अली को दूसरे ट्रिब्यूनल सदस्यों की मौजूदगी में दिया। इस फार्म के साथ उन्होंने सभी जरूरी कागजात जिसमें हिमाचल प्रमाण पत्र व आधार कार्ड की प्रति भी लगाई थी।
जब उन्होंने फार्म जमा करवा था उस समय उन्होंने उनसे रसीद भी मांगी थी। इस पर उन्होंने कहा कि आपको हमारे ऊपर यकीन नहीं है। इससे उन्होंने रसीद लेनी उचित नहीं समझी। अब उन्हें अखबार के माध्यम से पता चला कि नया अध्यक्ष चुन भी लिया गया और उसमें उनकी उम्मीदवारी का जिक्र तक नहीं किया गया।
महबूब अली ने आरोप लगाया कि ऐसा करके ट्रिब्यूनल ने उनके साथ बेइंसाफी की है और लोकतंत्र का गला घोटा है। उन्होंने ट्रिब्यूनल अध्यक्ष से इस मामले की जांच करके उनको इंसाफ दिलाने और हाल ही में हुए चुनाव को रद्द करने की मांग की है।
ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता शकील अहमद शेख ने पत्र मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि महबूब अली जानते थे कि अध्यक्ष पद को लेकर दो गुटों में विवाद चला हुआ है। मामला बड़ा पेचीदा है, दोनों ओर से कई आरोप प्रत्यारोप लगे हुए हैं। ऐसे में उनका रसीद नहीं लेना बेहद आश्चर्य की बात है। उनको चाहिए था वह मुझे सीधे अपना फार्म दे देते। बहरहाल, वह इस मामले की जांच को लेकर जल्द बैठक बुलाएंगे क्योंकि अध्यक्ष होने के नाते उनकी भी साख इससे जुड़ी है।
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