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Sirmour News: बारिश में खेती में सावधानी बरतें किसान, धान-मक्का में पोषक तत्व प्रबंधन पर जोर

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सब्जियों की खेती के साथ प्रसंस्करण को आय का जरिया बनाने की सलाह
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संवाद न्यूज एजेंसी
धौलाकुआं (सिरमौर)। बरसात में खेतों में खड़ी फसलों को मौसम की मार से बचाने के साथ किसान उत्पादन लागत घटाकर आमदनी बढ़ाने पर भी ध्यान दे सकते हैं। चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के प्रसार शिक्षा निदेशालय ने अगस्त के दूसरे पखवाड़े के लिए जारी कृषि सलाह में धान, मक्का, तिल, माश और सोयाबीन सहित सब्जियों तथा पशुपालन को लेकर किसानों को जरूरी सुझाव दिए हैं। धान में मजबूत मेड़बंदी करने और उचित समय पर नाइट्रोजन की टॉप ड्रेसिंग करने की सलाह दी गई है। मक्का में दूसरी एवं अंतिम टॉप ड्रेसिंग नमी की स्थिति में करने को कहा गया है, जबकि तिल और माश में खरपतवार, रोग और कीट नियंत्रण पर ध्यान देने की जरूरत बताई है। निचले पर्वतीय क्षेत्रों में मूली, शलजम, गाजर और पालक की बिजाई तथा मध्यवर्ती क्षेत्रों में फूलगोभी, बंदगोभी और अन्य सब्जियों की रोपाई की सलाह दी गई है।
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वहीं, किसानों और ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त फल एवं सब्जियों से अचार, मुरब्बा, जैम और स्क्वैश तैयार कर मूल्यवर्धन करने की सलाह दी गई है। इससे खराब होने वाली उपज को उत्पाद में बदलकर अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिल सकता है। बरसात में नमी और तापमान बढ़ने से पशुओं में चिचड़, पिस्सू, मक्खी-मच्छर और अन्य परजीवियों का प्रकोप बढ़ सकता है। पशु आवास को साफ-सुथरा और सूखा रखने तथा आवश्यक टीकाकरण और पशु चिकित्सक की सलाह लेने पर जोर दिया गया है। कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर, धौलाकुआं के प्रभारी डॉ. पंकज मित्तल ने किसानों को सलाह दी कि बरसात में फसल और पशुधन की नियमित निगरानी करें तथा किसी भी रोग या कीट के लक्षण दिखाई देने पर विशेषज्ञ की सलाह लें। उन्होंने खेती को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय वैल्यू एडिशन और प्रसंस्करण के जरिए अतिरिक्त आय के अवसर तलाशने पर भी जोर दिया। क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार तकनीकी जानकारी के लिए किसान कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।
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