सड़कें हों चकाचक, बंदरों के आतंक से मिले निजात
प्रदेश सरकार के आज पेश होने वाले बजट से लोगों को उम्मीद
कहा-आडू की फसल को अच्छा समर्थन मूल्य दे सरकार
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राजगढ़ (सिरमौर)। जयराम सरकार नौ मार्च को अपना पहला बजट पेश करने जा रही है। इस बजट पर सभी वर्गों की निगाहें टिकी हैं। विशेषकर अन्नदाता किसान और बागवान नई सरकार से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। किसानों के खेतों को पानी और दवाइयां नहीं मिल रही हैं। बंदरों और जंगली जानवर खेती उजाड़ रहे हैं। ऐसे में हर तरह से सताए किसान सरकार से अपने लिए बेहतर योजना की आस लगाए हैं। ऐसे में क्या मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर जो स्वयं किसान परिवार से आते हैं, अपने बजट में किसानों के दर्द को कम करने पर खरा उतर पाएंगे? इस सवाल को लेकर अमर उजाला ने किसानों और बागवानों से बात की।
1. भूड़ गांव के रमेश भंडारी ने कहा कि बंदरों से मुक्ति दिलाई जाए। बजट में बंदरों और जंगली जानवरों से फसल को होने वाले नुकसान के लिए राहत राशि देने का प्रावधान किया जाए।
2. सैनवाला के सचिन आनंद ने कहा कि किसानों ने बंदरों के आतंक के कारण गेहूं-मक्की उगाना बंद कर दिया है। फलों को भी बंदर तहस-नहस कर रहे हैं। उनकी मेहनत तबाह हो रही है। लागत मूल्य भी नहीं मिल रहा है।
3. शमोगा के सुरेश ठाकुर ने कहा कि पर्यटन विकास को प्रोत्साहन दिया जाए। सड़कों की हालत सुधारी जाए। गुणवत्ता का ध्यान रखा जाए।
4. भाणत के अलबेल सिंह ने कहा कि हर खेत तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था हो। करोड़ों खर्च कर सैकड़ों सिंचाई स्कीमें बनी हैं, लेकिन अधिकतर किसान उससे वंचित हैं।
5. भाणत के अरुण वर्मा ने कहा कि किसानों को ब्याज मुक्त ऋण प्रदान किया जाए। उनकी फसलों का उचित बीमा हो, जिससे प्राकृतिक आपदा या मौसम की बेरुखी से फसलों को नुकसान पहुंचने पर किसानों को राहत मिल सके।
6. कडंग के रघुनाथ सिंह ने कहा कि राजगढ़ की पीच वैली में आडू को अच्छा समर्थन मूल्य दिया जाए, जिससे किसानों की आर्थिकी सुदृढ़ हो।
7. भुईरा के अनिल शर्मा ने कहा कि अनुदान पर दी जाने वाली दवाइयां समय पर देने की व्यवस्था हो। दवाइयां देरी से मिल रही हैं। अधिकतर किसान-बागवान महंगे दामों पर बाजार से दवाइयां खरीद रहे हैं।
8. कोट ढांग के विजय भारद्वाज ने कहा कि किसानों की नकदी फसलों के लिए विपणन की व्यवस्था की जाए।