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अरबों रुपये खर्चने पर भी नहीं मिला पानी

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water shimla
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अमर उजाला ब्यूरो
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शिलाई (सिरमौर)।
शिलाई की तीन पंचायतों के लिए करोड़ों रुपये से तैयार की गई चिचेड़ खड्ड से गिरनोल उठाऊ पेयजल योजना सफेद हाथी बन गई है। इसका लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल रहा है। इस योजना को तैयार करने के लिए सरकार ने 212.12 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे लेकिन बनते बनते इस पर 259.43 करोड़ रुपये व्यय कर दिए गए। हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों से पूर्व तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इसका उद्घाटन भी कर दिया। मजे की बात यह रही कि इस दौरान इस योजना से जुड़े कुछ गांवों को मात्र पांच मिनट ही पानी प्रदान किया गया। उसके बाद से आज तक ग्रामीणों को एक बूंद पानी नसीब नहीं हुआ है।
बताया जा रहा है कि उद्घाटन के दिन भी इस योजना से पानी लिफ्ट नहीं हुआ था। आईपीएच विभाग ने स्टोर टैंक में टैंकरों से पानी भरकर डाला था। इसके बाद ही इस योजना का लोकार्पण हुआ।
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कांडो-भटनोल पंचायत के सुनील, रतन सिंह, सूरत सिंह, बालकराम, संतराम, जवाहर सिंह, दलीप ठाकुर, नीका राम, रघुबीर सिंह, बांदली पंचायत के दिनेश ठाकुर, राजेंद्र सिंह, रतन सिंह, सुरेश कुमार, कपिल चौहान, राय सिंह, चमेल सिंह, शिरिक्यारी पंचायत के कल्याण सिंह, बारूराम, प्रदीप सिंह, कपिल कुमार, ज्ञान सिंह ने बताया कि योजना अभी भी आधी अधूरी पड़ी है। कई गांवों में पेयजल लाइन तक नहीं बिछाई गई है। चिचेड़ खड्ड से गिरनोल पेयजल स्टोर के मुख्य पेयजल टैंक गिरनोल तक पानी लिफ्ट नहीं हो रहा है। कागजों में ही इस योजना को पूर्ण किया गया है। योजना की मरम्मत के लिए रखा पैसा भी खर्च कर दिया गया है। योजना फिर भी आधी अधूरी ही है। तीन पंचायतों के 9 हजार लोग पेयजल से वंचित हैं। लोगों ने कहा कि एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री, आईपीएच मंत्री से इस योजना को सुचारु रूप से चलाने के लिए लिखा गया था लेकिन कुछ नहीं किया जा रहा है।
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उधर, आईपीएच शिलाई मंडल के सहायक अभियंता नितिन चिनोरी ने कहा कि स्टाफ की कमी के कारण यह योजना बंद पड़ी है। इस योजना को चलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
 
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