अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)।
डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने महंगी दवाइयां लिखने के मामले में संबंधित डॉक्टर से स्पष्टीकरण मांगा है। कॉलेज प्रशासन ने इस मामले में निदेशालय को भी ऑडिट रिपोर्ट भेज दी है।
अब विभाग के उच्चाधिकारी इस मामले में आगामी कार्रवाई अमल में लाएंगे। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इस मामले में अपने फार्मा विभाग से मरीज को पर्ची पर लिखी दवाओं का ऑडिट करवाया था। इसमें अस्पताल में उपलब्ध जेनेरिक दवाओं के साल्ट की उपलब्धता को भी जांचा गया। बहरहाल, मामले में निदेशालय को भेजी रिपोर्ट में डॉक्टर का नाम भी भेजा गया है। साथ ही संबंधित डॉक्टर को भी इसका स्पष्टीकरण देना होगा।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से अभी तक की गई जांच में सामने आया कि डॉक्टर ने मरीज को तीन हफ्ते की दवाएं लिखी थीं लेकिन बाजार से मरीज को तीन माह की दवाएं दी गईं। मेडिकल कॉलेज में तैनात डॉक्टर ने भी कॉलेज प्रशासन को यही जवाब दिया है। हालांकि, यह भी जांच का विषय है कि बिल के अनुसार दवाइयां तीन महीने की थी या नहीं।
बता दें कि मेडिकल कॉलेज नाहन में मरीज को एलर्जी के लिए 3118 रुपये की दवाएं बाजार से लिखी गई।
इसके बाद ‘अमर उजाला’ ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। मेडिकल कॉलेज प्रशासन के समक्ष मामला संज्ञान में आने के बाद पर्ची पर लिखी दवाओं का फार्मा विभाग से ऑडिट करवाया गया। साथ ही डॉक्टर से भी स्पष्टीकरण मांगा।
उधर, इस संबंध में कॉलेज के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. केके पराशर ने बताया कि फार्मा विभाग से प्राप्त ऑडिट रिपोर्ट को निदेशालय भेजा गया है। साथ ही डॉक्टर से मामले में स्पष्टीकरण भी मांगा है। उन्होंने बताया कि मरीज को बाजार से तीन हफ्ते की जगह तीन महीने की दवाएं लिखी गईं। फिर भी मेडिकल कॉलेज प्रशासन इस मामले में कार्रवाई करने में जुटा है।