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रोनहाट पाठशाला में 48 में से 47 छात्र फेल

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अमर उजाला ब्यूरो
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शिलाई (सिरमौर)।
जिला सिरमौर के सरकारी स्कूलों में बेहतरीन शिक्षा के सभी दावे खोखले साबित हो रहे हैं। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के दिनोंदिन गिर रहे स्तर के चलते अभिभावकों में भी रोष व आक्रोश बढ़ने लगा है। कई अभिभावक अपनी आर्थिक स्थिति के कारण अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में भले ही करवा रहे हैं लेकिन स्कूलों से बेहतर परिणाम न मिलने के कारण अब अभिभावकों की चिंताएं बढ़नी भी लाजमी है।
निजी स्कूलों में अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए अभिभावकों के पास बजट नहीं है। सरकारी स्कूल में स्टाफ की भारी कमी और अन्य अव्यवस्थाओं के बावजूद भी बच्चों का इन स्कूलों में पढ़ाना मजबूरी बन गया है। हाल ही में दसवीं कक्षा के नतीजों में गिरिपार क्षेत्र के लाधी महल इलाके के कई स्कूल ऐसे हैं जिनका वार्षिक परिणाम काफी खराब रहा।
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रोनहाट स्कूल में 48 बच्चों ने वार्षिक परीक्षा दी थी। इनमें से सिर्फ एक ही विद्यार्थी पास हो पाया है। शिलाई उपमंडल के लाधी महल क्षेत्र की कई राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं में दसवीं का वार्षिक परिणाम बेहद खराब रहने से अभिभावकों में रोष व्याप्त है।
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राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कोटी बोंच में 45 छात्रों में से 7, जासवी में 14 में से 2, अजरौली में14 में से 2 छात्र उत्तीर्ण हो पाए। रोनहाट स्कूल के प्रिंसिपल संजय कुमार ने बताया कि इसका मुख्य कारण स्कूलों में स्टाफ का अभाव रहा है। रोनहाट स्कूल में छठी, 7वीं, 8वीं कक्षा के छात्रों ने गणित शिक्षक के एक बार भी दर्शन नहीं हुए। नवमीं व दसवीं कक्षा में गणित शिक्षक के दर्शन तो हुए लेकिन, मातृत्व अवकाश के कारण महिला शिक्षक तीन महीने अवकाश पर रहीं। इसके बाद स्कूलों में भी छुट्टियां हो गईं। ज्यादातर बच्चे गणित व विज्ञान में पिछड़े हैं। जबकि, फेल हुए कुछ छात्रों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पूरे वर्षभर ग्राउंड साफ करवाए गए। स्कूलों में सुरक्षा के लिए जालियां लगवाई गईं। शिक्षक अन्य कार्य करवाते रहे। जब परीक्षा हुई तो सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए। ऐसा ही हाल दूसरे स्कूलों का भी है।
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