हाटी समिति का अधिवेशन रविवार को संगड़ाह के अंधेरी में हुआ। बैठक में गिरिपार क्षेत्र के शिलाई, पांवटा, राजगढ़ व संगड़ाह के तीन सौ लोग मौजूद रहे।
सभी लोग ठेठ पहाड़ी परिधान में दिखाई दिए। इस दौरान ठोठा, बुड़ेचु नृत्य, पहाड़ी व्यंजनों व पारंपरिक बिहुल की छाल से बनाई जाने वाली रस्सी बनाते लोगों की झलक दिखाई दी। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय हाटी समिति के अध्यक्ष डॉ. अमीचंद कमल ने की।
उन्होंने कहा कि गिरिपार को जनजातीय दर्जा दिलाने के लिए दो बार प्रधानमंत्री से मिल चुके हैं। अब देखना यह है कि सरकार कब संसद में इस प्रस्ताव को पारित करती है। उन्होंने कहा कि गिरिपार क्षेत्र के लोगों का रहन-सहन, रीति रिवाज, वेश भूषा जोनसार बाबर की तरह है। वहां जनजातीय दर्जा दिया जा चुका है। जबकि 45 साल से की जा रही यहां की मांग अब तक सिरे नहीं चढ़ पाई है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लोग सरकार की हर शर्त मानने के लिए तैयार हैं। बशर्ते गिरिपार को जनजातीय दर्जा देने की मांग को जल्द पूरा किया जाए। बैठक में शिलाई इकाई के अध्यक्ष ग्यार सिंह, पांवटा के ओपी चौहान, राजगढ़ के जयप्रकाश चौहान, संगड़ाह के भगवान सिंह शर्मा, केंद्रीय कार्यकारिणी के भगतरात वर्मा, कुंदन सिंह शास्त्री आदि ने भी अपने विचार प्रकट किए। बैठक में रामकृष्ण शर्मा, उदयराम शर्मा, वेद प्रकाश ठाकुर, जगत सिंह ठाकुर, स्थानीय पंचायत प्रधान पदमा ठाकुर, शीला देवी, वीरेंद्र शर्मा, जियालाल, विजेंद्र शर्मा, उजागर सिंह, प्रताप सिंह तोमर, बलबीर शर्मा, मोहन लाल तोमर, राजेंद्र ठाकुर, पृथ्वीराज चौहान, रामानंद चौहान, लेखराज मौजूद रहे।