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योजना चली नहीं, मरम्मत पर खर्च दिए लाखों

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उठाऊ सिंचाई योजना लाना-पालर बनी सफेद हाथी - फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला ब्यूरो

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नाहन (सिरमौर)।
उठाऊ सिंचाई योजना लाना-पालर ने आईपीएच की कार्यप्रणाली की पोल खोलकर रख दी है। संगड़ाह उपमंडल के साथ सटे लाना पालर गांव में विभाग की कार्यशैली किसानों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाई। पहले योजना के निर्माण कार्य में लेट लटीफी हुई। योजना का कार्य पूरा हुआ तो किसानों के खेतों में पानी नहीं पहुंचा। लिहाजा किसानों के उपजाऊ खेत बंजर हो रहे हैं। किसानों को अभी इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया है, जबकि विभाग ने योजना के रखरखाव और मरम्मत पर ही लाखों रुपये खर्च दिए। ऐसे में विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि अभी तक विभाग ने इस योजना का ट्रायल तक नहीं किया है। योजना का शिलान्यास 1997 में किया था। इसके बाद साल 2005 में इसका काम शुरू हुआ। 2012-13 में यह योजना तैयार हुई। लेकिन इसके पांच साल बाद भी योजना का लाभ नहीं रहा। 87 लाख रुपये की लागत से तैयार योजना की वर्तमान में हालत ठीक नहीं है। पाइप लाइन जर्जर है तो कई पाइप जंग के कारण फट भी चुके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यह योजना अभी चालू नहीं हो पाई है। विभाग ने पंप हाउस और टैंकों के मरम्मत कार्यों पर लाखों रुपये की राशि खर्च की दिखाई है।
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ग्रामीण तपन सिंह, विनय शर्मा, गोपाल सिंह, अनिल कुमार, राजेंद्र ठाकुर, बलबीर ठाकुर, सुरेंद्र, गोपाल, अरुण, कुलभूषण, रामेश्वर, कमल, सुरेश, प्रेमचंद, बालादत्त और रमेश शर्मा ने बताया कि इस योजना का आज तक उन्हें कोई लाभ नहीं मिला है। विभाग ने योजना की मरम्मत पर भी पैसा खर्च किया है। ऐसे में सरकारी धन के दुरुपयोग के साथ-साथ गोलमाल की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने जिला प्रशासन से योजना की जांच कराने की मांग की है।
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उधर, कनिष्ठ अभियंता संतोष कुमार ने बताया कि योजना ठीक है। लेकिन विभाग के पास ऑपरेटर नहीं है। इससे योजना चलाने में दिक्कत आ रही है। विभाग के पास ग्रामीणों की कोई शिकायत नहीं आई है। न ही ग्राम पंचायत ने अभी तक किसान विकास समिति का गठन किया है। ऐसे में भी दिक्कतें आ रही हैं।

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