अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)।
सिखों के 10वें गुरु गोविंद सिंह की 351 वीं जयंती पर गुरुद्वारा अस्थान साहिब नाहन जयकारों से गूंज उठा। हजारों संगतों ने इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की। दोपहर बाद शहर में जोरदार नगर-कीर्तन निकला जिसमें सैकड़ों लोग शरीक हुए। सिख समुदाय से जुड़े लोगों के हैरतअंगेज करतबों ने सबको दांतों तले अंगुली दबाने को विवश किया।
इस अवसर पर हजारों संगतों ने गुरुद्वारा साहिब में माथा टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया। संगतों के लिए विशाल लंगर का आयोजन भी किया गया जिसमें हजारों लोगों ने लंगर ग्रहण किया। गुरु गोविंद सिंह जी के जयंती समारोह की तैयारियां सिख समुदाय ने कई दिन पहले ही शुरू कर दी थीं। नाहन गुरुद्वारे को कई दिन पहले ही दुल्हन की तरह सजा दिया गया था। रात के समय गुरुद्वारे की सुंदरता देखते ही बनती थी।
जयंती के एक दिन पूर्व रंग बिरंगी रोशनियों की अद्भुत छटा से गुरुद्वारे की सुंदरता को और चार चांद लगे। जयंती अवसर पर सुबह से ही सिख समुदाय के लोग नाहन गुरुद्वारे पहुंच गए। सुबह अखंड पाठ का आयोजन हुआ। इसके बाद मुख्य ग्रंथी व जत्थों ने गुरुवाणी एवं गुरु महिमा का बखान किया। संगत को निहाल करते हुए मुख्यग्रंथी ने गुरु गोविंद के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु गोविंद सिंह का जन्म 1666 को बिहार के पटना साहिब में हुआ था। उन्होंने 13 अप्रैल 1699 में खालसा की स्थापना की थी। उन्होंने ही गुरु ग्रंथ साहिब को सिखों का पवित्र धर्म ग्रंथ घोषित किया था।
उन्होंने बताया कि अन्याय व अत्याचार के खिलाफ लड़ाई में पुत्रों के शहीद होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। उनका जीवन सिख पंथ के लिए आदर्श है। इस मौके पर विशाल लंगर भी सजाया गया जिसमें संगत ने जूता सेवा भी की। शाम के समय सिख समुदाय के लोगों द्वारा नगर-कीर्तन निकाला जिसकी अगुवाई पंज प्यारों ने की।
इस दौरान सबसे आगे पंज प्यारे उसके पीछे महाराज की सवारी और दर्जनों गुरु की संगत गुरुवाणी का जाप कर चल रही थी। नगर-कीर्तन गुरुद्वारा नाहन से शुरू होकर नया बाजार, चौगान, पक्का टैंक, कच्चा टैंक सहित गोविंदगढ़ मोहल्ला से होते हुए गुरुद्वारा साहिब के समीप संपन्न हुआ। इस मौके पर सिख समुदाय के लोगों ने हैरत अंगेज करतब भी दिखाए।