नाहन (सिरमौर)।
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सत्तासीन सरकार के उलट नतीजे देने वाले सिरमौर पर इस बार भी प्रदेश की नजरें रहेंगी। 2012 में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी लेकिन सिरमौर की पांच विधानसभा सीटों में तीन सीटों नाहन, पच्छाद व शिलाई में भाजपा के उम्मीदवार जीते। केवल रेणुका विधानसभा से कांग्रेस का प्रत्याशी जीता और पांवटा विधानसभा में निर्दलीय उम्मीदवार के सिर जीत का सहरा बंधा।
हालांकि यह पहली बार नहीं हुआ है। 1998 के बाद ही ऐसा हो रहा है। खासकर नाहन विधानसभा सीट पर जीता प्रत्याशी अकसर विपक्ष से ही चुनता आया है। नाहन विधानसभा सीट को लेकर लोगों में नटनी के श्राप को लेकर चर्चाएं आज जुबां पर हैं। 2012 में पहली बार नाहन विधानसभा से डॉ. राजीव बिंदल ने चुनाव लड़ा और अप्रत्याशित वोटों से जीत दर्ज की लेकिन जनता का फैसला सत्ता के उलट रहा।
इससे पहले भी अधिकतर बार नाहन की जनता जनार्दन सत्तापक्ष के उलट ही चलती रही।
नाहन जैसी हॉट सीट पर इस बार हिमाचल ही नहीं बल्कि हरियाणा के लोगों की भी नजरें हैं। हालांकि, वर्ष 1998 से पहले कुछ विधायक सत्ता पक्ष के जरूर चुने गए, लेकिन मंत्री नहीं बन सके। जनता पार्टी से जीतकर विधानसभा पहुंचे श्यामा शर्मा को ही एक बार मंत्री पद हासिल हो सका। अन्य नेता विधायक ही बनकर रह गए। नाहन कांग्रेस की परंपरागत सीट रही है। यहां से अकसर कांग्रेस के ही विधायक बनें लेकिन जब प्रदेश में कांग्रेस काबिज हुई तो विधायक किसी और दल के ही बनें।
बॉक्स के लिए----
सिरमौर में रहा है कांग्रेस का दबदबा
सिरमौर जिला की सभी विधानसभा क्षेत्रों को लें तो यहां पर कांग्रेस का पलड़ा भारी रहा है। वर्ष 1962 से लेकर अब तक सिरमौर की सियासत में भाजपा कई सालों तक अपना खाता भी नहीं खोल पाई। पच्छाद और शिलाई में वर्ष 2012 में भाजपा ने पहली बार अपना खाता खोला। जबकि, रेणुका उपचुनाव के दौरान सिर्फ एक बार भाजपा का विधायक विजयी हुआ।
बॉक्स----
नाहन विधानसभा क्षेत्र--
वर्ष सरकार विधायक
1998 भाजपा कांग्रेस (कुश परमार)
2003 कांग्रेस लोजपा (सदानंद चौहान)
2007 भाजपा कांग्रेस (कुश परमार)
2012 कांग्रेस भाजपा (डा. राजीव बिंदल)