गत वर्ष आए थे 148 केस, बरसात में ज्यादा रहता है सर्पदंश का खतरा
चंद्र ठाकुर
नाहन (सिरमौर)। सिरमौर जिले में सर्पदंश के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इन दिनों बरसात के चलते सर्पदंश के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। मेडिकल कॉलेज में अन्य अस्पतालों के मुकाबले सांप के काटने के ज्यादा मामले आए हैं। विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचे लोगों में सभी स्वस्थ हुए हैं। गत वर्ष 148 जबकि इस वर्ष अब तक 59 मामले सर्पदंश के आए हैं।
मेडिकल कॉलेज में 31 जुलाई तक कुल 27 केस आए हैं। इनमें 7 महिलाएं और 20 पुरुष शामिल हैं। सबसे अधिक जुलाई महीने में 11 मामले आए हैं। मेडिकल कॉलेज नाहन के अलावा जिले के अन्य अस्पतालों में 31 जुलाई तक आए 32 मामलों में 22 पुरुष और 10 महिलाएं शामिल हैं। जुलाई महीने में सबसे अधिक 14 मामले सामने आए। गत वर्ष की बात की जाए तो मेडिकल कॉलेज में 58 और अन्य अस्पतालों में 90 लोग सांप के काटने पर उपचार के लिए पहुंचे।
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जून और जुलाई में अधिक मामले
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो जून और जुलाई में सांप काटने के मामले अधिक आते हैं। वहीं अगस्त का महीना सबसे विषैला है, ऐसे में इस दौरान लोगों को सतर्क रहना होगा। सिरमौर में अधिकांश सर्पदंश ग्रामीण इलाकों, खेत और घर के अंदर होते हैं। यहां 90 प्रतिशत लोग खेतों और जंगलों के करीब घरों वाले गांवों में रहते हैं। सर्दियों में सांप काटने के मामले न के बराबर रहते हैं। जून से अक्टूबर के बीच यह संख्या बढ़ जाती है।
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सर्पदंश पर इन खास बातों का रखें ध्यान
सर्पदंश वाली जगह को स्थिर रखें, ताकि जहर ज्यादा न फैलें। अंग की पकड़ बनाने के लिए पट्टियों या कपड़े का हलके से बांधने के लिए प्रयोग करें, लेकिन रक्त आपूर्ति को अवरुद्ध न करें। अंग पर ज्यादा दबाव न डालें। जब तक पीड़ित को चिकित्सा स्वास्थ्य सुविधा तक नहीं पहुंचाया जाता, तब तक मुंह से कुछ भी न डालें। सर्पदंश पीड़ित को यथासंभव शीघ्र नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र और अस्पताल में ले जाएं। सर्पदंश से सूजन, खून का बहना, ऊपरी पलक का कमजोर पड़ना और पूरी तरह से आंख न झपक पाना, नजर में फर्क पड़ना आदि लक्षणों पर तुरंत चिकित्सक को सूचित करें।
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झाड़-फूंक या देसी इलाज में समय में गवाएं : डॉ. निसार
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. निसार अहमद ने बताया कि अब तक जिले में सर्पदंश के 59 मामले विभाग के पास पंजीकृत किए गए हैं। उपचार के दौरान किसी व्यक्ति की मृत्यु नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि बरसात के मौसम में सांपों की सक्रियता बढ़ जाती है और हर साल इस दौरान सर्पदंश के मामले जयादा सामने आते हैं। अक्सर देखा गया है कि लोग सांप के काटने पर पहले झाड़-फूंक या देसी इलाज में समय गंवा देते हैं। इसके चलते जहर शरीर में फैल जाता है और कई बार लोगों की जान तक चली जाती है।
उन्होंने अपील करते हुए कहा कि सांप के काटने पर झाड़-फूंक करने की बजाय तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाएं। यदि 1 से 2 घंटे के भीतर सही इलाज शुरू हो जाए, जहर के प्रभाव को रोककर व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है।
-संवाद