नाहन (सिरमौर)।
डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज नाहन में मरीजों को महंगी दवाएं लिखने के मामले की जांच शुरू हो गई है। एक दो दिन के भीतर जांच पूरी होते ही रिपोर्ट को उच्चाधिकारियों को शिमला भेजा जाएगा। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इस मामले की जांच अभी अपने स्तर पर शुरू की है। डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाओं का फार्मा विभाग से ऑडिट करवाया जा रहा है। ऑडिट की रिपोर्ट आने के बाद ही मेडिकल कॉलेज प्रशासन आगामी कार्रवाई अमल में लाएगा।
मरीजों को लिखी जा रही बाजार की महंगी दवाओं के मामले को ‘अमर उजाला’ ने 5 जनवरी के अंक में ‘एलर्जी के लिए लिख दीं 3118 रुपये की दवाइयां...’ शीर्षक के साथ प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन की नींद टूटी। कॉलेज प्रशासन ने खबर पर संज्ञान लेते हुए अपने स्तर पर मामले की जांच शुरू कर दी। हालांकि, यह देखना बाकि है कि कॉलेज प्रशासन इस मामले में कितनी सख्त कार्रवाई अमल में लाता है।
मामले में डॉक्टर का बचाव होता है या फिर बाजार की महंगी दवाएं लिखने वाले दूसरे डॉक्टरों के लिए भी यह कार्रवाई सबक बनेगी। बहरहाल, सोमवार तक फार्मा विभाग ऑडिट रिपोर्ट कॉलेज प्रशासन को भेज देगा।
उल्लेखनीय है कि नाहन अस्पताल पहले भी इस मामले को लेकर चर्चाओं में रहा। हालांकि, सरकार ने मरीजों को जैनरिक दवाएं लिखे जाने के सख्त निर्देश दिए हैं लेकिन चिकित्सकों पर निर्देशों का कोई असर नहीं हो रहा। हैरानी इस बात की भी है कि मरीज का टेस्ट व अन्य जांच किए बगैर ही बाजार की दवाएं लिखी जा रही हैं। कई मरीज बाजार की दवाएं लेने से भी परहेज कर रहे हैं तो कई एक दो खुराक लेकर ही चलते बनते हैं। ऐसे में कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठना लाजमी है।
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फार्मा विभाग करेगा ऑडिट
फार्मा विभाग को दवा की पर्ची ऑडिट के लिए भेजी गई है। जैसे ही रिपोर्ट मिलेगी उसे शिमला भेजा जाएगा। मेडिकल कॉलेज प्रशासन अपने स्तर पर भी इस मामले में जांच कर रहा है। सोमवार को रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है।
- डॉ. केके पराशर, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, मेडिकल कॉलेज नाहन।
मेडिकल कॉलेज की ओर से अभी कोई पत्र हासिल नहीं हुआ है। जैसे ही पत्र मिलेगा, इसका ऑडिट किया जाएगा।
- रजत कुमार, ड्रग इंस्पेक्टर, फार्मा विभाग।