नाहन (सिरमौर)।
हिमाचल निर्माता प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. वाईएस परमार के गृह जिला सिरमौर के कई ग्रामीण क्षेत्रों का जीवन बेहद जटिल है। सड़क के अभाव में कई गांवों से लोग पलायन करने को विवश हैं। खस्ताहाल सड़कों पर लोग जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं।
प्रथम मुख्यमंत्री के गांव को जोड़ने वाली सड़क तक अभी पक्की नहीं हो पाई। दुर्गम क्षेत्रों में आज भी दैनिक उपयोग की जरूरी वस्तुएं घोड़े-खच्चर पर गांव तक पहुंचाई जाती हैं। वादों की झड़ी लगाने वाले राजनीतिक दल चुनाव जीतने के बाद सब भूल जाते हैं।
प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. वाई एस परमार के गृह क्षेत्र बागथन के चनहालग गांव से गुजरने वाली बनेठी, बागथन, राजगढ़, चंदोल सड़क पांच दशक बाद भी खस्ताहाल है। इस सड़क का कुछ हिस्सा अभी तक भी पक्का नहीं हो पाया है जो हिस्सा पक्का हुआ, वहां भी टारिंग उखड़ने लगी है।
जिला सिरमौर के तीन निर्वाचन क्षेत्रों नाहन, रेणुका व पच्छाद के कई गांवों को इस सड़क का लाभ मिल रहा है। जिला के कई गांव सड़क से नहीं जुड़ने के कारण लोग पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। गाभर, खुईनल, भीतरकुईं, चंबियाला और पांवटा के कुलथीना गांव के यह हालत है। गाभर को लें तो कभी यहां की आबादी 300 थी। लगभग 35 परिवार यहां रहते थे लेकिन वर्तमान में यहां मुश्किल से सात-आठ परिवार के 40-50 लोग रह रहे हैं। तमाम युवाओं ने निचले क्षेत्रों को पलायन कर दिया है।
3000 किलोमीटर सड़कें बनीं
सिरमौर जिला भौगोलिक दृष्टि से फैला हुआ है। दूर-दूर बसे गांवों तक सड़क पहुंचाना आसान भी नहीं है। अब तक सिरमौर में लगभग तीन हजार किलोमीटर संपर्क सड़कों का निर्माण हुआ है। जबकि कई गांव अभी भी सड़क सुविधा से वंचित हैं।
कोट्स--
1. भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता एवं विधायक डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि सिरमौर की 70 फीसदी सड़कें खस्ता है। मेजर डिस्ट्रिक रोड तक बदतर हो गए हैं। नाहन हलके में ही 16 सड़कों की डीपीआर यह सरकार नहीं बना पाई।
2. जिला कांग्रेस अध्यक्ष अजय सोलंकी ने कहा है कि वर्तमान सरकार ने सड़कों के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास किए हैं। भौगोलिक परिस्थिति की वजह से कुछ सड़कों में देरी जरूर हुई होगी। सिरमौर में जो विकास हुआ वह कांग्रेस की देन है।