नाहन (सिरमौर)। जिला सिरमौर के निचले क्षेत्रों में गर्मी ने दस्तक दे दी है। लिहाजा, वन संपदा को बचाने के लिए वन विभाग मुस्तैद हो गया है। 15 अप्रैल से शुरू होने वाले फायर सीजन के दौरान पेश आने वाली दिक्कतों से निपटने के लिए विभाग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। आग बुझाने के लिए कमेटियों का गठन कर दिया गया है। वन कर्मचारियों की छुट्टियां भी रद्द कर दी गई हैं। खास यह है कि इस बार विभाग ने फायर स्क्वायड तैयार किए हैं। फायर स्क्वायड रेंज ऑफिसर की निगरानी में चलेंगे। फायर सीजन को देखते हुए वन कर्मियों की छुट्टियां भी रद्द कर दी गई हैं। तकरीबन तीन माह तक विभाग के कर्मचारी अवकाश नहीं ले पाएंगे। इसके अलावा वन विभाग ने साझा वन प्रबंधन कमेटियां बनाई हैं। यह वन कमेटियां विभाग को पूरा सहयोग करेंगी। जहां कहीं भी आगजनी की घटना घटेगी, समितियां विभाग को सूचित करने के साथ-साथ स्वयं भी आग पर काबू पाने का प्रयास करेंगी। साझा वन कमेटियों का गठन ग्रामीण स्तर पर किया गया है। जिसमें ग्रामीण भी शामिल हैं। गांव के लोगों को इन कमेटियों में शामिल किया गया है। डिविजन कार्यालय नाहन में कंट्रोल रूम स्थापित किया है। कहीं भी आगजनी की घटना हुई तो कर्मचारी तुरंत कंट्रोल रूम पर संपर्क करेंगे। यहां से सुपरिंटेंडेंट घटना की जानकारी ब्लॉक व रेंज स्तर पर तैनात अधिकारियों व अन्य विभाग के कर्मियों को देंगे। इसके अलावा विभिन्न इलाकों में फायर वाचर भी तैनात किए गए हैं।
चार क्षेत्र अति संवेदनशील घोषित
वन मंडल नाहन में चार क्षेत्रों को अति संवेदनशील घोषित किया है। धारटीधार के जमटा, कालाअंब क्षेत्र के त्रिलोकपुर, नाहन व कोलर वन परिक्षेत्र अति संवेदनवशीन जोन में आते हैं। धारटीधार में चीड़ व अन्य निचले क्षेत्रों में साल व सैन खैर व अमलतास आदि के घने जंगल होने के कारण इन क्षेत्रों में आग का खतरा अधिक बना रहता है। धारटीधार क्षेत्र के बनेठी व जमटा क्षेत्र में अधिक संख्या में चीड़ के जंगल हैं। इन जंगलों पर विभाग के कर्मचारी पैनी नजर रखेंगे।
सीजन 15 जुलाई तक चलेगा : डीएफओ
डीएफओ पी वेंकटेश ने बताया कि वन संपदा को बचाने के लिए विभाग तैयार है। विभाग ने कर्मचारियों का अवकाश बंद कर दिया है। उन्होंने बताया कि सीजन 15 जुलाई तक चलेगा। चार वन परिक्षेत्रों में वन संपदा की रक्षा के लिए फायर स्क्वायड बनाए गए हैं। रेंजर, बीओ, फोरेस्ट गार्ड व अन्य कर्मचारी वन संपदा की रक्षा करेंगे। ग्रामीणों से भी वनों को बचाने में सहयोग लिया जाएगा।