अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)।
आमतौर पर कवि सम्मेलनों में बड़े नामों की धूम रहती है लेकिन यह मंच कुछ अलग था। इस मंच पर नवोदित रचनाकार मुख्य कवि के रूप में आमंत्रित किए गए। जबकि वरिष्ठ कवि श्रोता के रूप में शामिल हुए। मौका था उद्गार साहित्यिक एवं सामाजिक मंच देहरादून द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन का।
जिला सिरमौर की सीमा से सटे विकासनगर में हुए इस सम्मेलन में युवाओं का साहित्यिक मनोबल बढ़ाने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में धर्मशाला से आई साहित्यकार डॉ. अदिति गुलेरी ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। जबकि पांवटा से ताल्लुक रखने वाली कवयित्री शिवा धरावेश व शिवराज सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वयोवृद्ध कवि देव सारंग ने की। डॉ. अदिति गुलेरी ने उद्गार संस्था के दृष्टिकोण की सराहना की। उन्होंने कहा कि बच्चे इस देश की धरोहर हैं। इनसे हमारा अतीत सोता है, वर्तमान करवट लेता है जबकि भविष्य अंकुरित होता है। अतैव साहित्य में इस नींव को समृद्ध करने का प्रयास अच्छा है। शिवा धरावेश ने कहा कि अमूमन बच्चों को नेताओं से लेकर स्कूलों के कार्यक्रमों में जबरन दर्शक के रूप में बैठा दिया जाता है। इससे उनके भीतर कैसे उच्च कवि जन्म लेगा।
इस मौके पर कुमारी मुग्धा ने ‘हम भारत के वासी हैं..भारत देश हमारा है..’, रूखसार ने ‘मां-बाप बच्चों का कभी बुरा नहीं चाहते..’, अरुण क्षेत्री ने ‘बंदूक नहीं कलम हो हाथ में..’, सुधा भारद्वाज ने ‘यह मंद मंद चांदनी जिया को जला रही है...’, दीपक कैशी ने ‘कामयाबी का एक ही मंत्र है..’, अभिजीत कौशल ने ‘खामोश है मेरे घर का आंगन..’, कविता सुनाकर अपनी साहित्यिक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम के दौरान पवन शर्मा, शिवराज सरहदी, शिवराज सिंह, साहित्यकार हेमचंद्र सकलानी, पांवटा की कवयित्री शिवा धरावेश, संतोष गोयल, पुष्पेंद्र त्यागी, सोम देश प्रेमी, देहरादून के आनंद दीवान, संजय प्रधान, मजाहिर खान, राशिद राही, यशपाल सजवान, अतुल गौड़, विनम्र वशिष्ठ, कुलदीप यादव आदि साहित्यकार एवं कवि उपस्थित रहे।