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जंबूखाला स्कूल का बनेगा भवन, 6.30 लाख रुपये मंजूर

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संजय भारद्वाज
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नाहन (सिरमौर)।
शिक्षा खंड पांवटा साहिब के अंतर्गत जंबूखाला स्कूल को अब पक्की इमारत मिलेगी। घासफूस की झोंपड़ी में चल रहे इस स्कूल के भवन निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। चार साल के बाद स्कूल के लिए वन विभाग की जमीन मुहैया हो गई है। लगभग सात बिस्वा जमीन शिक्षा विभाग के नाम हस्तांतरित हो गई है।


शिक्षा विभाग ने भी भवन निर्माण के लिए पहली किस्त के रूप में 6.30 लाख रुपये का बजट मंजूर कर दिया है। झोंपड़ी में चल रहे स्कूल का मुद्दा ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से उठाया था जिसके बाद संबंधित शिक्षा और वन विभाग हरकत में आए।
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शिक्षा खंड पांवटा में एनएच-707 लालढांग-रोहडू राष्ट्रीय राजमार्ग से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर घने जंगलों के बीच बसे जंबूखाला गांव के इस स्कूल में गुज्जर समुदाय के बच्चे पढ़ते हैं। वर्ष 2016-17 के सत्र में स्कूल का दर्जा बढ़ाकर मिडल कर दिया गया था लेकिन भवन नहीं बन सका। मिडल तक की कक्षाएं घासफूस से बनी झोंपड़ी में ही चल रही हैं।
वर्तमान में प्राथमिक पाठशाला जंबूखाला में लगभग 30 बच्चे हैं। गौरतलब है कि वर्षों से यह स्कूल झोंपड़ी में चल रहा था।


वन विभाग की जमीन होने के कारण यहां भवन का निर्माण नहीं हो सका। कई बार फाइल वन विभाग के पास पहुंची, लेकिन आपत्ति लगाकर वापस भेज दी जाती। अब जाकर तमाम औपचारिकताएं पूरी हो गईं हैं। जमीन भी शिक्षा विभाग के नाम हो गई है।
शिक्षा उप निदेशक प्रारंभिक दलीप सिंह नेगी ने बताया कि जमीन मिलते ही 6.30 लाख रुपये का बजट स्कूल को जारी कर दिया गया है। जल्द ही इसका निर्माण कार्य आरंभ हो जाएगा।
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1992 में खुला था स्कूल
जंबूखाला में वर्ष 1992 में स्कूल खोला गया। तभी से यह झोंपड़ी में चल रहा है। विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों में बच्चे पांचवीं से आगे नहीं बढ़ पा रहे थे। गांव का एक ही बच्चा अभी तक मैट्रिक तक पढ़ाई कर पाया है। आगे की पढ़ाई के लिए करीब तीन किलोमीटर जंगल के रास्ते जाना पड़ता है, जहां जानवरों, जहरीले सांपों का खतरा तो है ही, बरसात में में पैदल चलना मुश्किल हो जाता है।
 
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