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गिरि नदी में रोज फेंका जा रहा सैंकड़ों टन मलबा और मिट्टी

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गिरि में हर दिन फेंका जा रहा सैकड़ों टन मलबा
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जटौन बैराज पर मंडरा रहे खतरे के बादल
सिल्ट से भर जाता है बैराज, उत्पादन प्रभावित
योगेंद्र अग्रवाल
ददाहू (सिरमौर)। अवैध खनन की भेंट चढ़ चुकी गिरि नदी में इन दिनों भारी मलबे और मिट्टी के ढेर लगे हुए हैं। हर दिन सैकड़ों टन मलबा गिरि नदी में फेंका जा रहा है। इसे ठेकेदारों और भवन निर्माताओं की ओर से फेंका जा रहा है।
यह मलबा गिरि नदी पर बने जटौन बैराज के लिए खतरा बन गया है। जून के अंत में बरसात शुरू होने वाली है। बरसात के दौरान यह मलबा और मिट्टी जटौन बैराज में समा जाएगी, जिससे विद्युत उत्पादन प्रभावित होने के साथ-साथ बैराज भी सिल्ट से भर जाएगा। ऐसे में पानी की मात्रा कम और सिल्ट अधिक भरने से बांध परियोजना के प्रबंधकों को भारी हानि उठानी पड़ेगी। बावजूद इसके क्षेत्र भर में चल रहे सभी भवनों के निर्माण की मिट्टी और मलबे को बेरोकटोक गिरि नदी में उड़ेला जा रहा है। प्रतिवर्ष सिल्ट बढ़ने के कारण टरबाइन मशीनों को बंद रखा जाता है। इससे जहां उत्पादन पूरी तरह ठप हो जाता है वहीं लाखों रुपये की हानि भी उठानी पड़ती है। वैसे जटौन बैराज प्रबंधन ने गिरि नदी के मुहाने पर बाकायदा चेतावनी बोर्ड लगाकर मिट्टी और मलबे को नदी में न फेंकने की लोगों से अपील की है। इसके बावजूद लोग मलबा-मिट्टी यहां फेंकने से बाज नहीं आ रहे।
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उधर, जटौन बैराज के सहायक अभियंता कमलजीत शर्मा ने बताया कि गिरि नदी में मलबा और मिट्टी को रोकने के लिए जिला प्रशासन के साथ-साथ पुलिस की भी मदद ली जाएगी। उन्होंने माना कि यह मलबा और मिट्टी बरसात के दौरान बैराज में समा कर मशीनों के लिए खतरा पैदा करती है। इससे उनको कई घंटों तक बंद रखना पड़ता है। इससे निश्चित तौर पर उत्पादन पर प्रभाव पड़ता है, जबकि बरसात के समय अधिक उत्पादन होना चाहिए।
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