ददाहू (सिरमौर)।
रेणुकाजी तीर्थ का ऐतिहासिक परशुराम ताल अपनी सुंदरता को लगातार खोता जा रहा है। गर्मी की तपिश के कारण इस ताल का अगला हिस्सा सूखना शुरू हो गया है जिसमें से गाद तक नजर आने लगी है।
रेणुका झील से पानी की निकासी कम होने के कारण इस ताल का 25 फीसदी हिस्सा सूख चुका है जिसमें से झांक रही गाद इसकी सुंदरता को मुंह चिढ़ा रही है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2017 में वन्य प्राणी विभाग ने परशुराम ताल से गाद निकालने पर 1.45 लाख रुपये की राशि खर्च की थी लेकिन यह राशि पर्याप्त नहीं हुई। इस कारण विभाग को गाद निकालने का कार्य अधूरा ही छोड़ना पड़ा। अब गर्मियों के कारण सूखने लगे इस ताल से गाद नजर आने लगी है जो यहां आने वाले श्रद्धालुओं व पर्यटकों को अखर रही है।
यह बात अलग है कि यदि विभाग चाहे तो अभी इसकी हालत सुधार सकता है। बरसात शुरू होने से पहले विभाग के पास एक माह का समय है जिसमें वह इस ताल से गाद निकालने का कार्य शुरू कर सकता है। यदि यह कार्य इस एक माह में पूरा नहीं हो पाता है तो उसके बाद यह कार्य करना मुश्किल हो जाएगा। बरसात में पानी भर जाने से यह गाद निकाली नहीं जा पाएगी।
बता दें कि तीन हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह परशुराम ताल यहां आने वाले श्रद्धालुओं व पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। बावजूद इसके रखरखाव को लेकर विभाग के पास कोई ठोस नीति नहीं है। यही कारण है कि मौजूदा समय में इस ताल का 25 फीसदी हिस्सा सूख चुका है जिससे बाहर झांक रही गाद पर्यटकों को मुंह चिढ़ा रही है।
उधर, वन्य प्राणी विभाग के आरओ अश्वनी कुमार ने बताया कि बीते वर्ष परशुराम ताल से गाद निकालने के लिए 1.45 लाख रुपये की राशि खर्च की गई थी लेकिन इससे अधिक बजट का प्रावधान न हो सका। परशुराम ताल से गाद निकालने के लिए विभाग से बजट मांगा गया है। फिलहाल रेणुका झील से गाद निकालने का कार्य प्रगति पर है। इस झील से दो लाख रुपये के बजट से गाद निकालने का कार्य किया जा रहा है।