अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)। हिमाचल ज्ञान-विज्ञान समिति की जिला सिरमौर इकाई द्वारा नाहन में आयोजित जिला स्तरीय सम्मेलन के दूसरे दिन राज्य सचिव ने अपनी रिपोर्ट पेश की जिस पर जिलावार सभी प्रतिनिधियों ने चर्चा की। इस दौरान युवाओं व विशेषज्ञों को जोड़ने, विभिन्न मुद्दों पर वैज्ञानिकता पर आधारित विकल्पों को पेश करने, समावेशी समाज के मूल्यों को आगे बढ़ाने पर चर्चा की गई।
समिति के राष्ट्रीय सहसचिव एवं हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति के सचिव डॉ. प्रमोद गौरी ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं सांस्कृतिक प्रतिरोध विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने आज के सामाजिक एवं राजनैतिक वातावरण पर चिंता प्रकट करते हुए कहा कि समाज में एक खास तरह की विचारधारा को थोपने की कोशिश की जा रही है जो कि बेहद चिंता की बात है।
डॉ. गौरी ने देश में वैज्ञानिकों की हत्या, मीडिया पर हमलों को भी एक स्वस्थ एवं जागरूक समाज के लिए घातक बताया। पत्रकारिता से जुड़े एवं तकनीकी विकास समिति के अध्यक्ष डीपी गुप्ता ने वैज्ञानिक सोच एवं दृष्टिकोण पर अपना वक्तव्य पेश किया जिसमें उन्होंने इंसान के शरीर में मस्तिष्क को दुनिया के सबसे विकसित पदार्थ के रूप में परिभाषित करते हुए कहा कि इसके इस्तेमाल को लेकर भी आज समाज में गंभीर चुनौती है। टीवी चैनलों पर अधिकांश समय बाबाओं द्वारा दिए जा रहे प्रवचनों से हर प्रकार की समस्या के समाधान देने की कुप्रथा को बढ़ावा दिया जा रहा है जो कि चिंता का विषय है।
महिला समानता व सामाजिक न्याय के सत्र को डॉ. रीना सिंह तंवर व मीनू ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं पर आर्थिक स्वतंत्रता, सुरक्षा तथा स्वायतता के हमले हुए हैं। महिलाओं के खिलाफ हिंसा, यौन हिंसा, साइबर अपराध बढ़े हैं। यही नहीं महिलाओं के खिलाफ जातिगत अपराधों की भी बढ़ोतरी हुई है जो कि चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि देश में परंपराओं के नाम पर हिंदुवादी विचारधारा को आक्रामक ढंग से आगे लाया जा रहा है। इससे जनतांत्रिक आंदोलन को मजबूत करके ही मुकाबला किया जा सकता है। बैठक में राज्य भर की सभी इकाइयों से आए पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।