नाहन (सिरमौर)।दिवाली के नजदीक आते ही आतिशबाजी से होने वाले वायु व ध्वनि प्रदूषण को लेकर बहस तेज हो गई है। कुछ लोग जहां पर्यावरण को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं, वहीं कुछ ने इसे धर्म के नाम पर प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है।
दिवाली किस तरह से मनानी चाहिए। इस बारे में ‘अमर उजाला’ ने नाहन के लोगों की राय जानी।
नया बजार निवासी केडी गौतम ने कहा कि लोगों को हरित दिवाली मनाने पर जोर देना चाहिए। हरित दिवाली, स्वस्थ दिवाली बेहतर है। फिर भी यदि लोग आतिशबाजी करना चाहें तो उन्हें घरों-दुकानों से दूर खुले मैदान में आतिशबाजी करनी चाहिए।
रानीताल निवासी विजयश्री गौतम ने कहा कि दिवाली के दिन चंद मिनटों में करोड़ों रुपये बर्बाद हो जाते हैं। पटाखों से निकलने वाले जहरीले प्रदूषण से भयानक बीमारियां लग जाती हैं। लोगों को चाहिए वह हरित दिवाली मनाएं तथा पटाखों पर खर्च होने वाले पैसे से गरीबों की मदद करें। रानीताल निवासी अनु भारद्वाज ने कहा कि स्वच्छ हवा में सांस लेना सबका संवैधानिक अधिकार है। प्रदूषण मुक्त हवा के लिए सभी को सहयोग देना चाहिए।
लोगों को चाहिए कि दिवाली की खुशियां दीप जला कर व गरीबों की मदद कर मनाएं।
रामकुंडी निवासी समाजसेवी दलीप सिंह वर्मा ने कहा कि पटाखों से वायु में कणिका तत्व में अत्यधिक वृद्धि हो जाती है जिससे बुजुर्गों व बच्चों को सांस लेने में दिक्कत होती है। दमे के दौरे का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में लोगों को दिवाली की खुशी परंपरागत तैलीय दीपकों का इस्तेमाल कर मनानी चाहिए। पटाखों से दूर रहना चाहिए।