नाहन (सिरमौर)।
सिरमौर जिले के धार्मिक स्थलों में सूतली बम फोड़ने, सीसीटीवी तोड़ने और आगजनी जैसी वारदातों से धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने की हिमाकत करने वाले तक पहुंचना पुलिस के लिए आसान नहीं था। इसके लिए पुलिस को एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ा।
वैज्ञानिक आधार से भी जांच हुई लेकिन कोई परिणाम हाथ नहीं लगा। फिंगरप्रिंट, मोबाइल लोकेशन और मोबाइल डंप डाटा भी पुलिस की जांच में काम नहीं आया। पुलिस ने मामले में 250 लोगों से पूछताछ की 150 से अधिक फिंगरप्रिंट लिए। आरोपी इतना शातिर था कि उस तक पहुंचना आसान नहीं था लेकिन आरोपी का दिन में सोना और रात को चलना ही पुलिस की जांच का हिस्सा बना। पुलिस को जब किसी से यह जानकारी मिली तो उस पर निगाहें रखनी शुरू कर दी गई।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी की स्थानीय ग्रामीणों के साथ नहीं बनती थी। परिवार से अलग होकर आरोपी गांव से काफी दूर एक खेत में रहता था। वहां ट्यूबवेल के साथ ही उसका एक कमरा था। मोबाइल लोकेशन और डंप डाला में उसका नंबर ट्रेस तक नहीं हुआ। शक के आधार पर पुलिस ने उसे पूछताछ के लिए बुलाया। पूछताछ के बाद जब उसके घर की तलाशी ली तो पिपलीवाला से चोरी हुए सामान की बरामदगी से उसके कारनामों के राज खुल गए। पुलिस के अनुसार आरोपी इतना शातिर था कि रात को वह पैदल निकल पड़ता था और अपना मोबाइल घर पर ही रख लेता था।
मेलियों में पुस्तकें जलाने के मामले में भी गिरफ्तार आरोपी का ही हाथ है, यह पूछने पर डीएसपी प्रमोद चौहान ने कहा कि पूछताछ में सब खुलासा होगा। वहां की रजाइयां जलाने की बात तो उसने कबूल कर ही दी है। वह ऐसा क्यों करता था, इसका सवाल भी पुलिस को तलाशना होगा। पुलिस के पास इस मामले से जुड़े दो वैज्ञानिक आधार भी हैं। एक उसके फिंगर प्रिंट जिन्हें वारदात वाले स्थान से मिले फिंगरप्रिंट से मैच किया जाएगा। दूसरा धार्मिक स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी से मिले फुटेज। इन फुटेज को और क्लीयर करने के लिए बाकायदा चंडीगढ़ भी एक्सपर्ट के पास भेजा गया है।