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मंदिर पहुंचने से पहले ही लील गई मौत

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अमर उजाला ब्यूरो
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राजगढ़ (सिरमौर)। उत्तराखंड के हनोल मंदिर पहुंचने से पहले ही मामा-मामी और भांजे को मौत लील गई। शिमला के कोटखाई में हुए कार हादसे के शिकार तीनों लोग पच्छाद के पझौता इलाके के रहने वाले थे। किसी को क्या पता था कि मंदिर तक का सफर उनके परिवार के लिए ताउम्र पीड़ादायक सफर बन जाएगा। इस हादसे से पझौता इलाके में शोक की लहर है।
मंगलवार को कोटखाई और बीते सोमवार को सोलन के समीप हुए दो सड़क हादसों में राजगढ़ इलाके के पांच लोगों की मौत हो गई है। मंगलवार को उत्तराखंड के हनोल मंदिर में माथा टेकने जा रहे राजगढ़ के पझौता इलाके की नेरी भगोट पंचायत के गांव पड़िया के रहने वाले रणजीत, उनकी पत्नी उमा के अलावा शाया सनौरा पंचायत के धामला निवासी उनके भांजे राजेश कंवर की कोटखाई में हुए कार हादसे में मौके पर ही मौत हो गई। तड़के ही तीनों अपने परिजनों के साथ राजेश कंवर की कार से मंदिर जा रहे थे लेकिन, मंदिर पहुंचने से पहले ही कार हादसे का शिकार हो गए। राजेश कंवर एक कर्मठ समाजसेवी होने के साथ सहकारिता से भी जुड़े थे। वह अपनी पत्नी और बेटे को पीछे छोड़ गए हैं। उनके मामा रणजीत सिंह एक अध्यापक थे। उन्होंने काफी पहले नौकरी छोड़कर कृषि और बागवानी को अपनाया। वह और उनकी पत्नी दोनों एक साथ इस दुर्घटना में मारे गए। रणजीत सिंह दो बेटे और चार बेटियों का भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके बच्चों की शादियां हो चुकी हैं लेकिन, राजेश कंवर के बेटे की उम्र मात्र 17 साल है। वह अभी पढ़ रहा है। देर शाम तक मृतकों के शव राजगढ़ नहीं पहुंच पाए थे। बहरहाल, तीन लोगों की मौत ने पझौतावासियों को झकझोर कर रख दिया है। पझौता क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है।
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अपनी बदनसीबी पर रो रहा कंडा गांव
राजगढ़ (सिरमौर)। सोलन-राजगढ़ सड़क पर सोमवार को कार दुर्घटना में मारे गए ग्राम पंचायत छोगटाली के कंडा गांव के दो युवकों रविंद्र और भूपेंद्र का मंगलवार को एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान क्षेत्र के सैकड़ों लोग शामिल हुए। यह इस गांव का दुर्भाग्य है कि तीन साल पहले भी इस गांव के दो युवकों सतेंद्र और तरुण की भी सड़क पर बह रहे नाले में मोटरसाइकिल बहने से मौत हो गई थी। उस समय भी उन दोनों का अंतिम संस्कार एक साथ किया गया था। उससे भी बड़ा दुर्भाग्य यह है कि उस हादसे में मारे सतेंद्र और सोमवार हादसे में मारे गए रविंद्र भाई-भाई थे। एक मां ने पिछले तीन साल में दो दुर्घटनाओं में दो बेटे खो दिए हैं। रविंद्र का एक बेटा आठ साल और भूपेंद्र एक बेटा और एक बेटी हैं। समूचे क्षेत्र में शोक पसरा है और कंडा गांव अपनी बदनसीबी पर आंसू बहा रहा है।
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