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तीसरी बार सैंपल फेल होने पर रद्द हो दवा कंपनी को लाइसेंस

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अमर उजाला ब्यूरो
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पांवटा साहिब (सिरमौर)। हिमाचल प्रदेश आरटीआई एक्टिविस्ट संघ प्रधान राजेंद्र मोहन रमौल का कहना है कि जिन दवाइयों के सैंपल बार-बार फेल हो रहे हैं, उनकी निर्माता कंपनी पर शिकंजा कसा जाना चाहिए। ऐसी इकाइयों के खिलाफ प्रदेश सरकार व संबंधित विभाग के अधिकारी सख्त कार्रवाई करे। यदि तीसरी बार सैंपल फेल हों तो संबंधित कंपनी का लाइसेंस रद किया जाना चाहिए। रमौल पांवटा में आयोजित संघ की बैठक को संबोधित कर रहे थे।
बैठक में विगत सप्ताह पांवटा के वरिष्ठ नागरिक केसी नागपाल दंपति को नशीली पदार्थ सूंघाकर बेहोश करने और फिर लूटपाट करने की घटना पर चिंता प्रकट करते हुए पुलिस को मामला गंभीरता से लेने की मांग की गई। बैठक में कहा गया कि पांवटा में बढ़ रही इस तरह की आपराधिक घटनाएं इलाके की शांति व्यवस्था के लिए शुभ संकेत नहीं है।
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इकाई के प्रधान आरएम रमौल, एनएन खतरी, एमएल गुप्ता, समीर शर्मा, एनडी सरीन, बीबी अग्रवाल व बीपी भारद्वाज ने कहा कि प्रदेश की दवा इकाइयों के बार-बार सैंपल फेल होना चिंतनीय है। जिन कंपनियों के सैंपल तीसरी बार फेल होते हैं, उनका लाइसेंस रद किया जाए। जिन दवाओं का सैंपल फेल हो, उसका बैच नंबर मीडिया में दिया जाए जिससे जनता तक फेल सैंपल वाली दवा पहुंचने की आशंका न रहे। बैठक में कहा गया कि भारत सरकार जैनरिक दवाइयों के उपयोग पर जोर दे रही है। यह दवाइयां सस्ती भी होती हैं लेकिन इन दवाइयों की भी जांच की जानी चाहिए ताकि समय-समय पर इनकी गुणवत्ता का भी पता चल सके।
 
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