योगेंद्र अग्रवाल
ददाहू (सिरमौर)।
गिरिनदी में पानी का स्तर घटने के कारण विद्युत उत्पादन ठप होने के कगार पर पहुंच गया है। राज्य बिजली बोर्ड का कमाऊ पुत कहलाए जाने वाली गिरि परियोजना में उत्पादन क्षमता घटकर मात्र 5 मेगावाट (8 फीसदी)पर सिमट चुकी है जो बिजली उत्पादन के लिए एक बड़ा खतरा है।
इन दिनों गिरिनदी के जल में आई भारी गिरावट ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इन दिनों 92वें फीसदी उत्पादन का नुकसान झेलना पड़ रहा है। अगर यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में मशीनों को भी बंद रखना पड़ सकता है।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक शत प्रतिशत 60 मेगावाट उत्पादन के लिए 46 क्यूमेक्स पानी की आवश्यकता होती है। जबकि इन दिनों गिरिनदी का जलस्तर घटकर मात्र 5 से 6 क्यूमेक्स के बीच ही रह गया है। जबकि गर्मी का प्रकोप अभी बढ़ा नहीं है। यदि यही स्थिति रही तो मई व जून महीने में उत्पादन पूरी तरह से ठप होकर रह जाएगा। मजबूरन मशीनों को बंद रखना पड़ेगा। गिरि परियोजना को राज्य बिजली बोर्ड की सर्वाधिक आय अर्जित करने वाली परियोजना के नाम से जाना जाता था लेकिन अब इस परियोजना पर संकट के बादल मंडराने लग पड़े हैं। मात्र 5 मेगावाट का उत्पादन इतनी बड़ी परियोजना के लिए ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। लगातार घट रहे जलस्तर के कारण दो टरबाइन मशीनों में से मात्र एक टरबाइन मशीन से 6 घंटे ही काम लिया जा रहा है। उत्पादन गिरने के कारण बिजली बोर्ड की चिंताएं भी बढ़ने लगी हैं तथा राज्य बिजली बोर्ड को इन दिनों भारी चपत सहन करनी पड़ रही है।
उधर, गिरि परियोजना के आरई रणधीर ठाकुर ने उत्पादन क्षमता घटकर मात्र 5 मेगावाट पर टिकने की पुष्टि करते हुए बताया कि तीन दिनों से ऐसी स्थिति बनी हुई है। गिरिनदी में पानी का स्तर गिरने के कारण यह समस्या उत्पन्न हो रही है। यदि वर्षा होती है तो उत्पादन में भी इजाफा हो सकता है।