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दवाई के लिए इधर-उधर भटकते रहे मरीज-तीमारदार

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नाहन मेडिकल कॉलेज परिसर की सरकारी डिस्पेंसरी में दवाई लेने के लिए लगी लोगों की लाइन। - फोटो : अमर उजाला ब्य़ूरो
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नाहन (सितंबर)। समय: 11:25 बजे। स्थान नाहन मेडिकल कॉलेज। दवाई की पर्ची लेकर पहुंचा रिशु पहले सिविल सप्लाई की दुुकान में पहुंचा लेकिन, डॉक्टर की लिखी सारी दवाइयां उसे वहां नहीं मिलीं। एक जगह पर सारी दवाई न मिलने से मरीजों को तीन दुकानों के चक्कर लगाने पड़े। मरीज कभी सरकारी डिस्पेंसरी, कभी अमृत फार्मेसी तो कभी सिविल सप्लाई की दुकान में देखे गए। शुक्रवार को ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में दवा विक्रेता हड़ताल पर रहे। केमिस्ट की दुकानें बंद होने के कारण मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालात यह रहे कि प्रशासनिक प्रबंधों के बावजूद लोगों को खास राहत नहीं मिल पाई। सरकारी दुकान में चिकित्सक की लिखी सारी दवाइयां न मिलने के कारण लोगों को आधी-अधूरी दवाइयां लेकर ही लौटना पड़ा।
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नाहन मेडिकल कॉलेज में अमृत फार्मेसी, मेडिकल कॉलेज की डिस्पेंसरी के साथ ही सिविल सप्लाई की दुकान खुली रहीं। दुकानों के बाहर दवाइयां लेने के लिए दिनभर लोगों को हुजूम उमड़ा रहा। लेकिन, यहां पर भी उन्हें तमाम दवाइयां उपलब्ध नहीं हो पाईं। चिकित्सक से चेकअप के बाद जब पर्ची पर दो, तीन या चार प्रकार की दवाइयां लिखी गईं तो उनमें से कुछ दवाइयां इन दुकानों में मिलीं और कुछ नहीं। ऐसे में मरीज परिसर की तीनों दुकानों के चक्कर काटते हुए देखे गए। अस्पताल में पहुंचे सुनील, देवेंद्र तोमर, अंजना पुंडीर ने कहा कि चेकअप के बाद उन्हें चिकित्सक ने तीन-चार दवाइयां लिखी हैं लेकिन उन्हें तमाम दवाइयां उपलब्ध नहीं हो पाईं। पहले तो वह बारी-बारी दुकान के बाहर लाइन में घंटों खड़े रहे लेकिन, तीनों दुकानों में जाने के बावजूद उन्हें सारी दवाइयां नहीं मिलीं। कुछेक दवाइयां लेकर ही उन्हें वापस लौटना पड़ रहा है।

प्रशासन प्रबंधों की निकली हवा
जिला प्रशासन ने केमिस्ट एसोसिएशन की हड़ताल के चलते पहले ही दवाइयों का प्रबंध करने का दावा किया था। इसके लिए नाहन मेडिकल कॉलेज के अलावा जिले के अन्य अस्पतालों में भी सरकारी दवाइयों की दुकानें खुली रखने के आदेश दिए गए थे। इसके तहत दुकानें खुली भी रहीं लेकिन, चिकित्सकों की ओर से लिखी कई दवाइयां इन दुकानों में भी उपलब्ध नहीं हो पाईं।
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क्या कहते हैं चिकित्सा अधीक्षक
मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके पराशर का कहना है कि सरकारी डिस्पेंसरी में ही 200 से अधिक प्रकार की दवाइयां उपलब्ध हैं। जबकि, अमृत फार्मेसी और सिविल सप्लाई की दुकान में भी विभिन्न दवाइयां हैं। ऐसे में क्यों दवाइयां नहीं मिलीं यह उनके ध्यान में नहीं है। इसका पता लगाया जाएगा।
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