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180 किमी दूर पहुंचकर सुनाया अपना दुखड़ा

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अमर उजाला ब्यूरो
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नाहन (सिरमौर)। जिले के दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली की पोल खुल रही है। सरकार की ओर से दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य संस्थान तो खोल दिए गए हैं लेकिन, इन संस्थानों में न डॉक्टर हैं और न ही अन्य स्टाफ। राजगढ़ के तहत धामला पीएसची के भी यही हालात हैं। यहां की स्वास्थ्य सेवाओं से आक्रोशित लोग करीब 180 किलोमीटर का सफर तय कर नाहन पहुंचे और सीएमओ डॉ. केके पराशर को अपना दुखड़ा सुनाया।
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ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामीणों की छोटी सी बीमारी के लिए भी राजगढ़ और सोलन जाने के लिए 50 से 70 किलोमीटर का सफर तय करना मजबूरी बन गई है। सीएमओ से मिले प्रतिनिधिमंडल ने धामला पीएचसी में नियमित डॉक्टर की तैनाती के साथ एंबुलेंस सेवा देने की मांग प्रमुखता से उठाई। प्रतिनिधिमंडल में शामिल राजेश कंवर, नयन सिंह, राजेंद्र सिंह, परसराम आदि ग्रामीणों ने बताया कि धामला पीएचसी वर्ष 1989 से चल रही है। मौजूदा समय में यहां डॉक्टर नहीं हैं। फार्मासिस्ट की हाल ही में तैनाती हुई है। यहां एंबुलेंस चालक का पद भी है लेकिन, एंबुलेंस का न होने के कारण चालक सराहां में सेवाएं दे रहा है। उन्होंने कहा कि इलाके की जदोल टपरोली, नेहरटी बघोट, शाया सनौरा, कोटला बांगी पंचायतों के दर्जनों गांवों के अलावा हाब्बन और डिब्बर पंचायतों की आधी आबादी धामला पीएचसी पर ही निर्भर है। सोलन-पैण कुफर सड़क पर लगातार सड़क हादसे बढ़ रहे हैं। आधा दर्जन पंचायतों के केंद्रबिंदु धामला पीएचसी में स्टाफ की भारी कमी के चलते हादसे में घायलों को उपचार नहीं मिल रहा है। उन्होंने मांग की कि जल्द धामला पीएचसी को नियमित डॉक्टर के साथ एंबुलेंस सेवा भी उपलब्ध कराई जाए। उधर, सीएमओ डॉ. केके पराशर ने उन्हें डॉक्टर देने और एंबुलेंस सेवा का आश्वासन दिया।
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