फाइलों में सिमटी फायर हाइड्रेंट लगाने की योजना
दो माह में अग्निकांड के दो दर्जन मामले, लाखों का नुकसान
शहर में पांच हाइड्रेंट; एक खराब, चार में प्रेशर नहीं
पांवटा साहिब (सिरमौर)। पांवटा साहिब क्षेत्र में गर्मियों के मौसम में हर वर्ष आग की घटनाओं से करोड़ों की क्षति होती है। लेकिन, इस साल मार्च-अप्रैल में ही आग ने तांडव मचा दिया है। इन दो महीनों की अवधि में अब तक दो दर्जन से अधिक आग के मामले हो चुके हैं। इसमें लाखों रुपयों का नुकसान हो चुका है। उस पर शहर में हाइड्रेंट लगाने की योजना फाइलों में सिमट गई है। हजारों की आबादी वाले पांवटा शहर में महज पांच हाइड्रेंट लगे हैं। इनमें से एक खराब चल रहा है, जबकि चार में प्रेशर ही नहीं है।
एक दशक पहले पांवटा और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में करीब 179 फायर हाइड्रेंट लगाने की योजना तैयार की गई थी, लेकिन अब यह योजना ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। पांवटा के क्षेत्रों में पिछले एक दशक से आग के कारण करोड़ों की क्षति हो चुकी है। हर वर्ष फायर सीजन बुरी खबर लेकर आता है। पिछले कुछ वर्षो में गोंदपुर, रामपुरघाट समेत पांवटा के औद्योगिक क्षेत्रों सहित शहरी क्षेत्र में भी दर्जनों अग्निकांड के मामले सामने आ चुके हैं। इस दौरान बेहतर प्रेशर वाले फायर हाइड्रेंट की जरूरत होती है, जिससे फायर स्टेशन से पहुंचने वाले वाटर टेंडर (वाहन) को आग बुझाने के लिए उचित पानी मिल सके। पांवटा से फायर स्टेशन करीब आठ किलोमीटर मालवा कॉटन के समीप सूरजपुर में है। अग्निशमन वाहन पहुंचने से पहले ही करोड़ों की क्षति हो चुकी होती है। अप्रैल से फायर सीजन शुरू होने पर विभाग के लिए आग की घटनाओं से निपटना चुनौती भरा रहता है। पांवटा साहिब में गोंदपुर, रामपुरघाट, राजबन, सतौन, गिरिपार के खोड़ोंवाला, बद्रीपुर, हीरपुर, सूरजपुर, पुरुवाला, किशनपुरा, केदारपुर समेत कुंजा मतरालियों आदि संवेदनशील क्षेत्रों में सैकड़ों छोटी-बड़ी दुकानें और औद्योगिक इकाइयां हैं। गर्मियों के सीजन में आग से हर वर्ष करोड़ों की क्षति होती है। इस वर्ष मार्च से 27 अप्रैल तक आग के दो दर्जन मामले हो चुके हैं। इनमें गेहूं के खेतों में सैकड़ों बीघा भूमि पर फसल जल कर स्वाह हो चुकी है। गोशालाओं में आग से मवेशियों के मरने के मामले सामने आ चुके हैं।
हाइड्रेंट योजना मंजूरी को भेजी : चौधरी
फायर स्टेशन पांवटा (मालवा) केंद्र फायर ऑफिसर प्रेम चंद चौधरी ने कहा कि कुछ वर्ष पहले करीब 179 फायर हाइड्रेंट लगाने का प्राक्कलन सरकार और आईपीएच विभाग को भेजा गया था। इसके बाद शहरी क्षेत्र में करीब 32 फायर हाइड्रेंट लगाए जाने हैं। लेकिन, अभी योजना का कार्य शुरू नहीं हो सका है। पांवटा शहर में दशकों पुराने पांच हाइड्रेंट लगे हैं। इनमें से एक बंद है, जबकि 4 की हालत ज्यादा बेहतर नहीं है। फायर हाइड्रेंट को सीधे पेयजल आपूर्ति लाइन से जोड़ा गया है, जिससे इनमें प्रेशर बेहद कम रहता है।