करीब एक दशक बाद रेणुकाजी मिनी जू में जल्द ही टाइगर की दहाड़ सुनाई देगी। शुक्रवार शाम नागपुर से टाइगर का जोड़ा रेणुकाजी के लिए रवाना हो गया। करीब दो दिन के सफर के बाद दोनों के 20 सितंबर की रात या 21 सितंबर की सुबह रेणुकाजी पहुंचने की उम्मीद है। टाइगरों के साथ वन्य प्राणी विभाग की टीम भी रवाना हुई है। सफर के दौरान उनके भोजन, विश्राम और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। रेणुकाजी पहुंचने के बाद दोनों टाइगरों को तुरंत आउटडोर इंक्लोजर में नहीं छोड़ा जाएगा। करीब 10 दिन तक उन्हें इनडोर वार्ड में चिकित्सकों की निगरानी में रखा जाएगा। नए वातावरण के अनुकूल होने के बाद दोनों को आउटडोर इंक्लोजर में शिफ्ट किया जाएगा। दो अक्तूबर से पर्यटक पहली बार रेणुकाजी में टाइगरों का दीदार कर सकेंगे। दशहरे के दौरान यहां आने वाले पर्यटकों के लिए टाइगर नया आकर्षण बनेंगे।
हिमाचल में पर्यटकों के आकर्षण के लिए किसी मिनी जू में रखा जाने वाला यह टाइगर का पहला जोड़ा होगा। इनके स्वागत के लिए वन्य प्राणी विभाग ने 1.67 करोड़ से आधुनिक इंक्लोजर तैयार किया है। इसके अलावा 32 लाख रुपये की लागत से वन्य प्राणी अस्पताल भी बनाया गया है। टाइगरों के पहुंचने से रेणुकाजी मिनी जू में करीब एक दशक से चली आ रही कमी दूर होने की उम्मीद है। लंबे समय से टाइगरों का इंतजार कर रहे पर्यटकों को अब इन्हें करीब से देखने का मौका मिलेगा। वन्य प्राणी मंडल शिमला के डीएफओ डॉ. शाहनवाज अहमद भट्ट ने बताया कि टाइगरों का जोड़ा नागपुर से रवाना हो चुका है। सुरक्षित सफर के लिए रास्ते में भोजन और विश्राम की व्यवस्था की गई है। रेणुकाजी पहुंचने के बाद दोनों को करीब 10 दिन तक चिकित्सकों की निगरानी में रखा जाएगा।