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Shimla Yug Murder Case : ऐसे खुला युग की हत्या का राज, वीडियो में रोते हुए कहता था मुझे बचा लो

Tue, 23 Sep 2025 09:14 PM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

Shimla Yug Murder Case : वर्ष 2015 में शिमला पुलिस ने चोरी के एक मामले में विक्रांत बख्शी नाम के व्यक्ति को पकड़ा था। इसके मोबाइल में पुलिस को युग की वीडियो मिली थी। इसके बाद सीआईडी ने 20 अगस्त 2016 को विक्रांत बख्शी की पहली गिरफ्तारी की। पढ़ें पूरी खबर...
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युग व उसकी मां (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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सीआईडी की टीम युग हत्याकांड मामले की जांच कर रही थी, लेकिन इसमें कोई कामयाबी नहीं मिल रही थी। इसी दौरान वर्ष 2015 में शिमला पुलिस ने खलीनी में हुई चोरी के मामले में विक्रांत बख्शी को पकड़ा। हालांकि वह कुछ दिन के बाद जमानत पर रिहा हो गया था, लेकिन मामले की जांच के लिए उसका मोबाइल कब्जे में लिया गया।

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फोरेंसिक विशेषज्ञों ने मोबाइल की जांच की तो उसमें युग का वीडियो मिला। इसके बाद सीआईडी ने 20 अगस्त 2016 को विक्रांत बख्शी की पहली गिरफ्तारी की। इसकी निशानदेही पर 22 अगस्त को कलस्टन में पानी के टैंक से युग के शरीर के अवशेष बरामद किए। इसके बाद चंद्र शर्मा और तेजिंद्र पाल की गिरफ्तारी की गई। इसी आधार पर जांच एजेंसी वहां पहुंची जहां युग को अपहरण के दौरान कमरे में रखा गया था। तलाशी के दौरान सीआइडी की एसआइटी के साथ फॉरेंसिक टीम भी मौजूद रही। यहां से ट्रेसिंग पेपर, अन्य पेपर, कोल्ड ड्रिंक और बेड बॉक्स में निशान पाए गए। इसके आधार पर दोषियों की गिरफ्तारी हुई।

पूछताछ में उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन वह युग को मोबाइल पर गेम खेलने का लालच देकर गोदाम में ले गए और वहां उसके हाथ पांव और मुंह पर टेप बांध दी। उसे गत्ते की एक पेटी में डाल दिया और उसे उठाकर कार्ट रोड ले गए। यहां उसे गाड़ी में डाला और नवबहार स्थित किराये के कमरे में ले गए। उसे वहां कोई देख न ले इसलिए बेड बॉक्स के अंदर छिपा देते थे। उसके कपड़े तक उतार दिए थे। वह चीखे चिल्लाए न इसलिए उसे जबरदस्ती शराब भी पिलाते थे। मोबाइल पर युग की वीडियो क्लिप भी बनाई। इसमें युग रोते हुए कहता है मुझे बचा लो।
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चुपचाप बैठी रहीं दादी, आंसुओं से छलका दर्द
युग की दादी चंद्रलेखा पिछले ग्यारह वर्षों से अपने पोते को न्याय मिलने की उम्मीद कर रही थी। मंगलवार को प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद घर के बाहर बुजुर्ग चुपचाप बैठीं थीं। वह कुछ बोल नहीं पा रही थीं लेकिन उनकी आंखों से बहते आंसू उनके दर्द को बखूबी बयां कर रहे थे। दादी ने बड़े नाजों से अपने पोते को पाला था लेकिन इस इस साजिश ने उनकी सारी खुशियां छीन लीं। आज भी उनकी बूढ़ी आंखें अपने पोते को घर के कोनों में तलाश करती रहती हैं।

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