आवासीय संस्थानों को 24 घंटे योग्य चिकित्सा सुविधा और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की उपलब्धता भी बतानी होगी। संस्थानों को यह भी बताना होगा कि दिव्यांग और ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों के लिए रैंप, सुलभ शौचालय, छात्रावास, सहायक तकनीक और परीक्षा में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं। शिक्षकों और कर्मचारियों को छात्र तनाव की पहचान के लिए प्रशिक्षण देने की जानकारी भी देनी होगी। उच्च शिक्षा निदेशक सुनीता सिंह ने स्पष्ट किया है कि अनुपालन नहीं होने पर संबंधित संस्थान प्रमुख की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय होगी। निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि सभी संस्थानों से मिली जानकारी एकत्र कर सुप्रीम कोर्ट में समेकित अनुपालन रिपोर्ट पेश की जाएगी।
हर छात्र आत्महत्या और अस्वाभाविक मौत की पुलिस को देनी होगी सूचना
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि किसी भी छात्र की आत्महत्या या अस्वाभाविक मौत की जानकारी मिलते ही संस्थान को तुरंत पुलिस को सूचित करना होगा। हॉस्टल, पीजी, किराये के मकान या परिसर से बाहर हुई घटनाएं भी इसमें शामिल होंगी। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों, कुलपति, रजिस्ट्रार और अन्य प्रमुख पदों की रिक्तियां चार माह के भीतर भरने को कहा है। आरक्षित वर्ग के खाली पदों को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए हैं। लंबित छात्रवृत्तियां भी चार माह में जारी करनी होंगी।