उधर नगर निगम ने राजधानी की सफाई व्यवस्था आउटसोर्स करने का फैसला ले लिया है। इसके लिए टेंडर भी आमंत्रित कर लिए हैं। अब ठेकेदारों के जरिये शहर की सफाई व्यवस्था का संचालन किया जाएगा। ठेकेदार हर वार्ड में कूड़ा उठाने के लिए अपने कर्मचारी तैनात करेगा। इनका काम सिर्फ घरों से कलेक्शन सेंटरों तक कूड़ा पहुंचाने का रहेगा। कलेक्शन सेंटरों से नगर निगम खुद अपने वाहनों से कूड़ा उठाकर भरयाल संयंत्र तक पहुंचाएगा। यदि हड़ताल जारी रहती है तो 20 मई के बाद शहर में नई व्यवस्था शुरू हो सकती है।
नगर निगम पहले हमारी मांग पूरी करे। इसके बाद ही कर्मचारी काम पर लौटेंगे। एजीएम बुलाने की सूचना नगर निगम ने फोन पर दी है। कोई लिखित पत्राचार नहीं हुआ है। प्रशासन कर्मचारियों की बैठक बुलाकर भी यह जानकारी दे सकता था। कर्मचारी एकजुट हैं। सोमवार सुबह फिर से धरना प्रदर्शन होगा। -जसवंत सिंह, अध्यक्ष सैहब सोसायटी कर्मचारी यूनियन
नगर निगम ने कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से लिया है। इसलिए आचार संहिता के तुरंत बाद एजीएम भी बुला ली है। कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी समझें और काम पर लौटें, जो कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे, उनकी सूची रोजाना प्रशासन को भेजी जा रही है।-भूपेंद्र अत्री, आयुक्त नगर निगम शिमला
जिला दंडाधिकारी ने एस्मा लागू किया है ताकि आवश्यक सेवाओं में शामिल सफाई व्यवस्था बनी रहे। हालांकि, इसके बावजूद कर्मचारी हड़ताल पर डटे हैं। जिला प्रशासन ने इसे आदेशों का उल्लंघन माना है। नगर निगम ने भी उपायुक्त को ऐसे कर्मचारियों की सूची भेजी है जो काम पर नहीं लौटे हैं। हड़ताल के लिए कर्मचारियों को उकसा रहे कर्मचारी नेताओं के नाम भी इसमें शामिल हैं। ऐसे में अब इन पर कार्रवाई तय है। कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान की तनख्वाह काटी जाएगी। अभी दो दिन की तनख्वाह काटी जाएगी। इसके अलावा कर्मचारी नेताओं की नौकरी भी जा सकती है। एस्मा न मानने पर यह कार्रवाई हो सकती है।
नगर निगम के नोटिस और एस्मा लागू होने के बाद कई कर्मचारी काम पर आने के लिए तैयार हैं। नगर निगम का दावा है कि इन कर्मचारियों ने प्रशासन से संपर्क किया है। साथ ही सोमवार से इनके काम पर लौटने की भी उम्मीद है। हालांकि, कर्मचारी नेताओं, सुपरवाइजरों की ओर से इन पर दबाव डाले जाने के भी आरोप है। आयुक्त भूपेंद्र अत्री के पास ऐसी शिकायतें भी पहुंची हैं।