इस खुलासे के बाद आशंका जताई जा रही है कि सर्वेश साइबर ठगों के जाल में फंसा हुआ था। हालांकि, ठगी किसने और किस तरीके से की, इसका खुलासा पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगा। आईआईटी जोधपुर और कोणार्क कोर की ओर से 17 और 18 जुलाई को ड्रोन प्रतियोगिता करवाई गई। सर्वेश ने इसी प्रतियोगिता में भाग लेने और चौथा स्थान हासिल करने का दावा किया था। इस संबंध में संस्थान के प्राचार्य चंद्रशेखर और सर्वेश के पिता संजीव शर्मा के बयानों में भी अंतर सामने आया है। प्राचार्य के अनुसार सर्वेश ने उन्हें बताया था कि वह ट्रेन से जोधपुर जाकर प्रतियोगिता में शामिल हुआ। पिता का कहना है कि बेटे ने ऑनलाइन प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की बात बताई थी।
सर्वेश ने 27 अक्तूबर को डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन (डीआईओ) को ईमेल भेजकर साइबर ठगी की शिकायत भी की थी। इसमें उसने अनुबंध और प्रतियोगिता में चौथा स्थान मिलने के प्रमाणपत्र का उल्लेख किया था। जांच मेंपता लगाया जाएगा कि सर्वेश किन लोगों के संपर्क में था, उसे प्रतियोगिता और फंडिंग से संबंधित दस्तावेज किसने उपलब्ध करवाए और 3.5 करोड़ की मंजूरी का दावा किस आधार पर किया गया। कंपनी के पंजीकरण, डीआईओ से हुए पत्राचार और व्हाट्सएप ग्रुप में साझा संदेशों की भी पड़ताल होगी। इधर, तकनीकी शिक्षा विभाग की ओर से गठित जांच कमेटी मंगलवार को बहुतकनीकी संस्थान बड़ू पहुंच सकती है। कमेटी को पूरे प्रकरण के सभी पहलुओं की जांच कर एक सप्ताह में रिपोर्ट सौंपनी है।
पिता बोले, ऑनलाइन लिया था हिस्सा...सर्वेश के पिता संजीव शर्मा ने बताया कि बेटे ने उन्हें प्रतियोगिता में ऑनलाइन भाग लेने की जानकारी दी थी। वह स्वयं जोधपुर नहीं गया था। उन्होंने कहा कि सर्वेश का स्वास्थ्य अब बेहतर है, लेकिन फिलहाल वह केवल तरल पदार्थ ले पा रहा है। जबड़े की सर्जरी अभी नहीं हुई है।
कमेटी मंगलवार को संस्थान आएगी। सर्वेश ने बताया था कि वह ट्रेन से जोधपुर जाकर प्रतियोगिता में शामिल हुआ, वह अधिक जानकारी साझा नहीं करता था। उसे बेहतर उपचार मिले, इसके लिए प्रयास हो रहे हैं। - चंद्रशेखर, प्राचार्य, राजकीय बहुतकनीकी संस्थान बड़ू, हमीरपुर