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Sanjauli Mosque: शिमला की संजौली मस्जिद में नमाज पढ़ने आए थे मुस्लिम लोग, स्थानीय ने किया विरोध; पुलिस पहुंची

Fri, 14 Nov 2025 02:54 PM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

राजधानी शिमला की संजौली मस्जिद में नमाज पढ़ने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। यहां मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज पढ़ने के लिए पहुंचे थे, लेकिन स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया।
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स्थानीय लोगों का विरोध करती पुलिस। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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राजधानी शिमला की चर्चित संजौली मस्जिद एक बार फिर सुर्खियों में है। संजौली में शुक्रवार को मस्जिद परिसर में नमाज अदा करने को लेकर दो गुटों में तनातनी बढ़ गई। इसके चलते क्षेत्र में माहौल तनावपूर्ण बन गया है। स्थानीय लोगों ने शुक्रवार को नमाज पढ़ी जबकि बाहरी लोगों को रोका गया। इससे समुदाय में असंतोष बढ़ गया है। जिला अदालत से संजौली मस्जिद के अवैध निर्माण को ध्वस्त करने का आदेश जारी हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब मस्जिद में किसी भी तरह की गतिविधि नहीं होनी चाहिए न ही इसमें नमाज पढ़ी जा सकती है।

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बावजूद इसके शुक्रवार दोपहर को सैकड़ों लोग नमाज पढ़ने मस्जिद पहुंच गए। वहीं स्थानीय लोगों के विरोध के चलते मौके पर स्थिति बिगड़ने लगी, जिसके बाद कई लोग बिना नमाज पढ़े ही लौट गए। तनाव बढ़ता देख प्रशासन तुरंत हरकत में आया। एडीएम, एसडीएम, थाना प्रभारी सहित बड़ी संख्या में पुलिस बल ने स्थिति को संभाला और दोनों पक्षों से बातचीत की और हालात को काबू किया। मस्जिद के बाहर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने गश्त बढ़ा दी है। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है।

गौरतलब है कि 30 अक्तूबर को जिला अदालत ने नगर निगम आयुक्त कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए संजौली मस्जिद के पूरे ढांचे को अवैध करार दिया था। हालांकि जिला अदालत के संजौली मस्जिद के अवैध निर्माण को गिराने का आदेश जारी किए जाने के अगले ही दिन सैकड़ों लोगों ने मस्जिद पहुंचकर नमाज अदा की थी। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कहा कि मस्जिद की शेष मंजिलें गिराए जाने से उन्हें बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद लतीफ ने कहा कि बाहरी राज्यों के प्रवासी मजदूरों को नमाज अदा करने से रोक दिया था जबकि स्थानीय मुसलमानों को अंदर जाने की अनुमति दी है। संजौली क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन सतर्क है और हालात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की है।

दो महीने में मस्जिद गिराने का आदेश
जिला अदालत ने हाल ही में नगर निगम आयुक्त कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए संजौली मस्जिद के पूरे ढांचे को अवैध करार दिया है। अदालत ने वक्फ बोर्ड और मस्जिद कमेटी को दो महीने के भीतर अनधिकृत निर्माण हटाने या ध्वस्त करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट चेतावनी दी कि निर्धारित समय में कार्रवाई न होने पर ध्वस्तीकरण नगर निगम शिमला की ओर से किया जाएगा और पूरा खर्च प्रतिवादियों से वसूला जाएगा। इससे पहले मस्जिद की तीन मंजिलें पहले ही गिराई जा चुकी हैं, अब नीचे की दो मंजिलों को हटाया जाना है।

दो गुटों में लड़ाई के बाद सुर्खियों में आया था मामला
31 अगस्त 2024 को शिमला के मैहली में दो गुटों में मारपीट के बाद से मस्जिद विवाद गरमाया था। 5 सितंबर 2024 को शिमला में हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन किया। 11 सितंबर को संजौली-ढली में उग्र प्रदर्शन किया गया। इस बीच 12 सितंबर को संजौली मस्जिद कमेटी खुद निगम आयुक्त कोर्ट पहुंची और खुद ही मस्जिद का अवैध हिस्सा तोड़ने की पेशकश की। हालांकि, 3 मई को एमसी आयुक्त कोर्ट ने इस पूरे मामले में अंतिम निर्णय ले लिया था। अब जिला अदालत ने भी इस फैसले पर मुहर लगाई है।
 
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संजौली मस्जिद मामले में कब क्या हुआ?
संजौली मस्जिद मामले में 50 से ज्यादा बार सुनवाई हुई।
31 अगस्त 2024 को मैहली में दो गुटों में मारपीट के बाद मस्जिद विवाद गरमाया।
1 और 5 सितंबर 2024 को शिमला में हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन शुरू किया।
11 सितंबर को संजौली-ढली में उग्र प्रदर्शन हुआ।
12 सितंबर को संजौली मस्जिद कमेटी आयुक्त कोर्ट में पहुंची
5 अक्तूबर 2024 को आयुक्त कोर्ट ने तीन मंजिलों को हटाने की अनुमति दी
30 नवंबर 2024 को अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने याचिका खारिज कर दी
3 मई 2025 को एमसी आयुक्त कोर्ट ने दो और मंजिलों को हटाने का आदेश दिया
वक्फ बोर्ड ने 17 मई को 3 मई के आदेशों को जिला न्यायालय में चुनौती दी
19 मई को सुनवाई में अदालत ने मस्जिद कमेटी से रिकॉर्ड तलब किया
23 मई को एमसी को दोबारा नोटिस जारी कर रिकॉर्ड पेश करने के लिए कहा
26 मई की सुनवाई में कोर्ट ने मस्जिद तोड़ने पर अंतरिम रोक लगाई।
29 मई को अदालत ने स्टे को बरकरार रखा
11 जुलाई को केस को बहस योग्य माना गया
8 और 21 अगस्त को वक्फ बोर्ड ने बहस के लिए समय मांगा
6 सितंबर को करीब सवा दो घंटे तक बहस हुई
30 अक्तूबर के लिए मामला सूचीबद्ध किया और फैसला सुनाया
 
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