राजधानी शिमला के संजौली में स्थित मस्जिद में हुए अवैध निर्माण के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। पुलिस धारा 163 के उल्लंघन के तहत कार्रवाई कर रही है। पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल 185 लोगों की पहचान कर ली है। पुलिस का दावा है कि करीब 60 ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिन्होंने प्रदर्शन के दिन पत्थरबाजी की थी।
'प्रदर्शनकारियों का मकसद मस्जिद तक पहुंचना था'
प्रदर्शनकारियों की पहचान के लिए पुलिस ड्रोन और वीडियो की मदद ले रही है। प्रदर्शन में शामिल लोगों के आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। प्रदर्शन में कई ऐसे लोग शामिल थे, जिनके खिलाफ पहले भी कई आपराधिक केस दर्ज हैं। पुलिस के मुताबिक तकनीक के जरिये ज्यादातर लोगों की पहचान कर ली जाएगी। इसके अलावा पुलिस प्रदर्शन का संचालन करने वालों के बीच हुई व्हाट्सएप चैट को भी खंगाल रही है। पुलिस का दावा है कि प्रदर्शनकारियों का मकसद मस्जिद तक पहुंचना था और इसे रोकने के लिए ही बलप्रयोग करना पड़ा। इस दौरान छह पुलिस कर्मी भी घायल हो गए थे, जिनमें दो को गंभीर चोटें आई हैं।
'हर पहलू की गहनता से पड़ताल'
पुलिस ने दूसरी बार बैरिकेड तोड़ने की कोशिश में प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया था। इसके साथ ही भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल भी किया गया। एसपी शिमला संजीव कुमार गांधी ने कहा कि पुलिस हर पहलू की गहनता से पड़ताल कर रही है।
संजौली में पुलिस बल तैनात, मस्जिद जाने वाले रास्ते सील
11 सितंबर को संजौली में हिंदू संगठनों के उग्र प्रदर्शन के बाद जिला पुलिस ने अभी भी संजौली बाजार में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया है। वहीं मस्जिद की ओर जाने वाले रास्ते अभी भी सील हैं। बैरिकेडिंग के जरिये सभी रास्तों को बंद किया गया है।