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रिपोर्ट: हमीरपुर में रोजगार की रफ्तार तेज, सोलन-सिरमौर में बेरोजगारी की मार, जानें अन्य जिलों का हाल

Sat, 19 Sep 2026 11:10 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

 किसी जिले में काम करने वालों की हिस्सेदारी प्रदेश के औसत से काफी ऊपर है तो कहीं औद्योगिक गतिविधियों के बावजूद बेरोजगारी और युवाओं के रोजगार से बाहर रहने की दर चिंता बढ़ा रही है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के सितंबर 2026 में जारी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के जिला स्तरीय आंकड़े प्रदेश के श्रम बाजार में मौजूद इस असमानता को सामने रखते हैं।
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हिमाचल में रोजगार की स्थिति पर सांख्यिकीकार्यालय की रिपोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में रोजगार की तस्वीर एक जैसी नहीं है। किसी जिले में काम करने वालों की हिस्सेदारी प्रदेश के औसत से काफी ऊपर है तो कहीं औद्योगिक गतिविधियों के बावजूद बेरोजगारी और युवाओं के रोजगार से बाहर रहने की दर चिंता बढ़ा रही है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के सितंबर 2026 में जारी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के जिला स्तरीय आंकड़े प्रदेश के श्रम बाजार में मौजूद इस असमानता को सामने रखते हैं। आंकड़ों के अनुसार हिमाचल प्रदेश में कुल श्रम बल सहभागिता दर (एलएफपीआर) 73.2 फीसदी, श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) 69.9 फीसदी और बेरोजगारी दर (यूआर) 4.5 फीसदी रही।  वहीं युवाओं के पढ़ाई, रोजगार या प्रशिक्षण से बाहर रहने यानी नीट की दर 20.5 फीसदी दर्ज की गई। जिला स्तर पर इन आंकड़ों में काफी बड़ा अंतर दिखाई देता है। 

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जिलावार ये है स्थिति
 जिलेवार आंकड़ों में हमीरपुर रोजगार और श्रम सहभागिता के लिहाज से सबसे ऊपर दिखाई देता है। यहां श्रम बल सहभागिता दर 83.5 फीसदी रहा, यानी काम करने की उम्र की आबादी में बड़ी हिस्सेदारी श्रम बाजार का हिस्सा है। वहीं श्रमिक जनसंख्या अनुपात 82.5 फीसदी दर्ज हुआ, जो प्रदेश के सभी जिलों में सबसे अधिक है। हमीरपुर का बेरोजगारी आंकड़ा भी अपेक्षाकृत कम 1.2 फीसदी रहा। हालांकि जिले की युवा नीट दर 9.3 फीसदी है। यानी जिले में श्रम बाजार में भागीदारी और रोजगार से जुड़े आंकड़े मजबूत रहने के बावजूद युवाओं के एक हिस्से के लिए पढ़ाई, प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़ने की चुनौती बनी हुई है। बेरोजगारी दर के लिहाज से मंडी सबसे निचले स्तर पर रहा। जिले में यूआर महज 0.8 फीसदी दर्ज की गई। 

 मंडी का श्रम बल सहभागिता दर 71.7 फीसदी
मंडी का श्रम बल सहभागिता दर 71.7 फीसदी और श्रमिक जनसंख्या अनुपात 71.2 फीसदी रहा। युवा नीट दर 15.4 फीसदी रही। ऊना भी कम बेरोजगारी वाले जिलों में रहा। यहां बेरोजगारी दर 1.4 फीसदी, एलएफपीआर 78.2 फीसदी और डब्ल्यूपीआर 77 फीसदी दर्ज हुआ। ऊना की युवा नीट दर 14.3 फीसदी रही। प्रदेश के औद्योगिक नक्शे पर महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले सोलन और सिरमौर के आंकड़े रोजगार के मोर्चे पर अलग तस्वीर पेश करते हैं। सोलन में बेरोजगारी दर 9 फीसदी रही, जबकि सिरमौर में यह बढ़कर 9.2 फीसदी हो गई। सिरमौर की बेरोजगारी दर प्रदेश में सबसे अधिक है। सोलन में सबसे बड़ी चिंता युवा नीट दर को लेकर सामने आती है। जिले में 39 फीसदी युवा न तो पढ़ाई कर रहे हैं, न रोजगार में हैं और न ही किसी प्रशिक्षण से जुड़े हैं। 

कांगड़ा में भी युवाओं की बड़ी संख्या रोजगार से बाहर
 कांगड़ा में एलएफपीआर 68.7 फीसदी और डब्ल्यूपीआर 64.3 फीसदी रहा। बेरोजगारी दर 6.5 फीसदी दर्ज हुई। युवा नीट दर 31.7 फीसदी रही, जो प्रदेश के औसत 20.5 फीसदी से काफी अधिक है। दूसरी ओर चंबा में युवा नीट दर महज 7.7 फीसदी रही। यह उपलब्ध जिला आंकड़ों में सबसे कम दरों में है। जिले का एलएफपीआर 77.1 फीसदी, डब्ल्यूपीआर 74.6 फीसदी और बेरोजगारी दर 3.2 फीसदी दर्ज हुई। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के अनुसार लाहौल-स्पीति, बिलासपुर और किन्नौर के संयुक्त क्षेत्र में भी युवा नीट दर केवल 4.8 फीसदी रही।
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शिमला में बेरोजगारी दर पर अलग तस्वीर
शिमला में श्रम बल सहभागिता दर 70 फीसदी और श्रमिक जनसंख्या अनुपात 65.1 फीसदी दर्ज हुआ। उपलब्ध आंकड़ों में बेरोजगारी दर का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, जबकि युवा नीट दर 20.5 फीसदी रही।
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