. 13 साल से इंतजार में आनी विस क्षेत्र की जनता, दावे साबित हुए खोखले
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. सालभर से भूअधिग्रहण की मंजूरी का है इंतजार, सपना कब होगा साकार .97 किलोमीटर लंबे एनएच के चुनावी दावे धरातल पर नहीं उतर रहे, लोगों में रोष हरिकृष्ण शर्मा आनी (कुल्लू)। प्रदेश के महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उच्च मार्गों में शामिल एनएच-305 आज भी अधूरी घोषणाओं और लंबित प्रक्रियाओं का शिकार बना हुआ है। वर्ष 2012 में अधिसूचित किए गए इस राष्ट्रीय राजमार्ग को 13 साल बीत चुके हैं, लेकिन आनी विधानसभा क्षेत्र की जनता अभी भी डबल लेन सड़क और जलोड़ी टनल के निर्माण की बाट जोह रही है। पर्यटन, व्यापार, रोजगार और जिला मुख्यालय से बेहतर संपर्क की जो उम्मीदें इस हाईवे से जुड़ी थीं, वे आज भी कागजों तक सीमित नजर आ रही हैं। वर्तमान में एनएच-305 की हालत बेहद खस्ताहाल है। खासकर, जलोड़ी जोत से औट तक का मार्ग सबसे अधिक जर्जर अवस्था में है। यहां जगह-जगह गड्ढे, टूटे डंगे और संकरी सड़क यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा रही हैं। बरसात और सर्दियों के मौसम में स्थिति और भी जोखिमभरी हो जाती है। इससे स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि बीते एक वर्ष से भूअधिग्रहण की फाइनल मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। एनएच-03 को एनएच-05 से जोड़ने वाले इस मार्ग के पहले चरण में सैंज से कंडूगाड़ तक के भूअधिग्रहण से जुड़े दस्तावेज अभी भी स्वीकृति के अभाव में लंबित हैं। फाइनल मंजूरी न मिलने के कारण आगे की निर्माण प्रक्रिया शुरू होना संभव नहीं हो पा रही है। इसी तरह जलोड़ी जोत टनल का मामला भी लटका हुआ है। टनल की फाइनल अलाइनमेंट तैयार होने के बावजूद इसके निर्माण को लेकर कोई स्पष्ट समय सीमा तय नहीं की गई है। यह टनल आनी को कुल्लू से सालभर जोड़ने में मील का पत्थर साबित हो सकती है। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण जलोड़ी पास पर यातायात बाधित हो जाता है। इससे लोगों को लंबा और जोखिम भरा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ता है। टनल बनने से न केवल यात्रा आसान होगी, बल्कि क्षेत्र के पर्यटन और स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। 97 किलोमीटर लंबे एनएच-305 को लेकर चुनाव दर चुनाव बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन धरातल पर प्रगति न के बराबर रही। इससे जनता में रोष और निराशा दोनों बढ़ती जा रही है।
भूअधिग्रहण से संबंधित सभी दस्तावेज विभाग की ओर से तैयार हैं। जैसे ही स्वीकृति मिलती है, अगली कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। -केएल सुमन, अधिशासी अभियंता, एनएचएआई