भावानगर/रिकांगपिओ (किन्नौर)। जनजातीय जिला किन्नौर की भावावैली में कोरोना काल में तूफान ने खूब तबाही मचाई। तूफान से घाटी के बागवानों और किसानों का भारी नुकसान हुआ है। तूफान से सबसे ज्यादा नुकसान बागवानों की सेब की फसल को हुआ है। तूफान ने पलभर में ही बागवानों की साल भर की मेहनत पर पानी फेर दिया। ऐसे में बागवानों को कोविड-19 महामारी के दौरान भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा है।
जानकारी के मुताबिक रविवार को भावावैली में अचानक तूफान आया। तूफान ने यंगपा 1, यंगपा 2, काफनू, कटगांव और कराबा पंचायतों के हरी मोहन, विजय कुमार, राजेश, विनय सिंह, नर सिंह, मुलक राम, शक्ति, भूपेंद्र, अरुण कुमार, मदन, सुनील और देश राज सहित अन्य बागवानों के सेब की फसल को तबाह कर दिया। तूफान ने तैयार फसल को बरबाद कर बागवानों की कमर तोड़कर रख दी है। बागवानों को तूफान से भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा है। जिले में अधिकतर बागवानों की आय का मुख्य साधन नकदी फसल सेब ही है, लेकिन तूफान ने सेब की फसल को खासा नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने प्रदेश सरकार से तूफान से फसल को हुए नुकसान का आकलन कर उन्हें उचित मुआवजा देने की मांग की है। बहरहाल, विभाग की टीम नुकसान का आकलन करने में जुट गई है।
एसडीएम निचार मनमोहन सिंह ने बताया कि राजस्व विभाग, उद्यान विभाग और तहसीलदार निचार को नुकसान का आकलन करने के लिए मौके पर भेजा है। नुकसान की रिपोर्ट बनाकर प्रदेश सरकार को भेजी जाएगी। उपायुक्त किन्नौर गोपाल चंद ने कहा कि भावावैली की पंचायतों कटगाव, यंगपा और काफनू में तूफान से सेब की फसल को नुकसान की सूचना मिली है। नुकसान का आकलन करने के लिए संबंधित विभाग को निर्देश दिए गए हैं।
बागवानों की साठ फीसदी फसल तबाह : नेगी
किन्नौर कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी ने कहा कि रविवार को भावावैली में आए तूफान के चलते बागवानों की करीब 60 फीसदी सेब की फसल तबाह हो गई है। इससे बागवानों को इस कोविड महामारी के दौरान भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा है। उन्होंने उद्यान और राजस्व विभाग से टीमें गठित कर शीघ्र नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मांग की है कि बागवानों के नुकसान का शीघ्र आकलन करके उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए।