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समस्याएं न सुलझीं तो एसडीएम दफ्तर के बाहर देंगे धरना

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राजपुरा प्रोजेक्ट से प्रभावित लोग अपने समस्या को लेकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए। - फोटो : RAMPUR-HP
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रामपुर बुशहर। वर्षों बाद भी 15 मेगावाट राजपुरा परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। परियोजना प्रभावित लाडा, रोजगार और मुआवजे से वंचित हैं। गुस्साए ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों चेताया है कि अगर उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया तो वे एसडीएम कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ जाएंगे।
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भड़ावली पंचायत के पूर्व उप प्रधान दिनेश खमराल की अध्यक्षता में मंगलवार को प्रभावितों का एक प्रतिनिधिमंडल एसडीएम सुरेंद्र मोहन से मिला और उन्हें ज्ञापन सौंपा। खमराल ने ने कहा कि पूर्व में जब वह पंचायत के उपप्रधान थे, तब भी कई बार परियोजना प्रबंधन को लिखित में फसलों के मुआवजे और स्थानीय युवाओं को रोजगार और लाडा की राशि जारी करने की मांग करते रहे। प्रोजेक्ट लगने से केवल यहां के ग्रामीणों की समस्याएं बढ़ी हैं।
परियोजना प्रबंधन का कहना है कि उनके प्रोजेक्ट से फसलों को कोई नुकसान नहीं पहुंच रहा, जबकि परियोजना के वाहनों से उड़ने वाली धूल के कारण किसान-बागवान परेशान हैं। युवा वर्ग आज भी रोजगार के लिए भटक रहा है। परियोजना का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और अब तक लाडा की राशि ही जारी नहीं हो पाई है, जो सबसे बड़ी हैरानी की बात है। उन्होंने कहा कि नियमों की उल्लंघना करने के बावजूद परियोजना पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
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ग्रामीण बोले-अंधेरे में रख रहा परियोजना प्रबंधन
स्थानीय युवक सुभाष चंद्र, मोहर सिंह, रणजीत सिंह, वीरेंद्र सहित अन्य ने बताया कि रोजगार को लेकर परियोजना प्रबंधन ने उन्हें अंधेरे में रखा है। यदि इसी तरह से ग्रामीणों की अहम मांगों को नजरअंदाज किया गया तो आने वाले दिनों में भड़ावली पंचायत के ग्रामीण एसडीएम कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ जाएंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।
ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन को 15 दिन का समय दिया है कि ग्रामीणों की समस्याओं को निपटाने के लिए प्रोजेक्ट प्रबंधन से बात करें। एसडीएम सुरेंद्र मोहन ने कहा कि भड़ावली पंचायत का एक प्रतिनिधिमंडल परियोजना से संबंधित मामलों को लेकर उनसे मिला है। इसे लेकर परियोजना प्रबंधन से बात की जाएगी। उधर, परियोजना प्रबंधक बीएस ठाकुर ने कहा कि परियोजना से फसलों को कोई नुकसान नहीं पहुंच रहा। छोटी परियोजना होने के कारण रोजगार की संभावनाएं कम हैं।
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