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धंस रही जमीन : खतरे में कमांद, कोफरीधार में गांव को बसाने की मांग

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कमांद गांव में भू-स्खलन की चपेट में आए ग्रामीणों के खेत। संवाद
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भारी बारिश और लगातार धंस रही जमीन से खौफ में 40 परिवार
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ग्रामीणों ने कोफरीधार में बसाने की सरकार और प्रशासन से उठाई मांग

जमीन धंसने से खेतों और घरों में आई दरारें, ग्रामीणों की उड़ी रात की नींद

हरिकृष्ण शर्मा

आनी (कुल्लू)। आनी विकास खंड की कमांद पंचायत का कमांद गांव लगातार भूस्खलन और जमीन धंसने के खतरे के साए में है। भारी बारिश के बीच गांव के आसपास लगातार हो रहे भूस्खलन और जमीन में पड़ रही दरारों ने 40 परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें हर वक्त इस बात का डर सताता रहता है कि कहीं पहाड़ी का बड़ा हिस्सा धंसकर गांव की ओर न आ जाए। यही वजह है कि कई परिवार रात के समय भी चैन से सो नहीं पा रहे हैं। ग्रामीणों ने सरकार से मांग उठाई है कि कमांद गांव के लोगों के सुरक्षित भविष्य को देखते हुए उन्हें गांव से सटे कोफरीधार में विस्थापित कर नया गांव बसाने के लिए जमीन उपलब्ध करवाई जाए। ग्रामीणों के अनुसार, कोफरीधार चट्टानी और अपेक्षाकृत मजबूत भूभाग है, जहां भूस्खलन का खतरा कम है।

इस साल फिर धंसी जमीन, मकानों और खेतों में आई दरारें
ग्रामीणों के अनुसार, इस वर्ष कमांद के पीछे स्थित डगसारी गांव के डीम नामक स्थान पर जमीन का बड़ा हिस्सा धंस गया। इसकी चपेट में स्थानीय निवासी घुंघर मल का मकान और गोशाला पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन धंसने की यह घटना कमांद गांव के लिए भी गंभीर खतरे का संकेत है। गांव के कई मकानों और खेतों में दरारें आई हैं। करीब 250 बीघा कृषि भूमि भी खतरे की जद में बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि खतरा केवल मकानों तक सीमित नहीं है। कमांद से होकर गुजरने वाले एनएच-305 को भी भूस्खलन के कारण भारी नुकसान पहुंचा है। सड़क का बड़ा हिस्सा धंसने के बाद एनएच प्राधिकरण को यहां नई सड़क का निर्माण करना पड़ा।
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2000 में शुरू हुआ आपदाओं का सिलसिला
कमांद गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि गांव के लिए भूस्खलन और बाढ़ का खतरा नया नहीं है। वर्ष 2000 में डगसारी गांव से लगते नाले के पास हुए भूस्खलन में एक गौशाला पूरी तरह मलबे में समा गई थी। इसमें दो गायें भी दब गई थीं। गनीमत रही कि भूस्खलन ने बाद में अपना रुख बदल लिया और मलबा नाले में बह गया, जिससे कमांद गांव बड़ी तबाही से बच गया। इसके बाद वर्ष 2002 में परकोट की तरफ से आए भूस्खलन और बादल फटने की घटना ने भी क्षेत्र में भारी तबाही मचाई। ग्रामीणों के अनुसार, सराली गांव में करीब तीन मकान मलबे की चपेट में आए और एक परिवार के कई सदस्य मलबे में बह गए, जिनका बाद में कोई पता नहीं चल पाया। इस आपदा में बड़ी संख्या में मवेशी, भेड़-बकरियां और गोशालाएं भी बह गई थीं।
बुजुर्ग बोले, सुरक्षित जगह पर बसाना ही समाधान
-90 वर्षीय धर्मदास का कहना है कि कमांद में पहले भी कई बार आपदाएं हो चुकी हैं और मकान तक दब चुके हैं। ऐसे में आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा के लिए सुरक्षित स्थान होना जरूरी है।
-85 वर्षीय रूप सिंह कहते हैं कि कमांद गांव अब सुरक्षित नहीं रह गया है। यदि सरकार कोफरीधार में ग्रामीणों के विस्थापन की व्यवस्था करती है तो इससे लोगों का भविष्य सुरक्षित हो सकता है।
-75 वर्षीय बुजुर्ग टलक सिंह का कहना है कि कमांद गांव अब खतरे की जद में आ चुका है। ऐसे हालात में ग्रामीणों का सुरक्षित स्थान पर विस्थापन जरूरी है।


भूगर्भीय जांच की मांग
कमांद पंचायत के प्रधान देवेंद्र ठाकुर ने कहा कि पंचायत का यह महत्वपूर्ण गांव असुरक्षित स्थिति में पहुंच गया है। लोगों की जमीनें बह रही हैं और लगातार खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने सरकार से कमांद क्षेत्र की भूगर्भीय जांच करवाने और ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध करवाने की मांग की है।
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जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया करेगी जांच
एसडीएम आनी लक्ष्मण सिंह कनेट ने बताया कि उन्होंने स्वयं उपायुक्त कुल्लू को कमांद क्षेत्र में हुए भूस्खलन और जमीन धंसने वाले स्थानों का निरीक्षण करवाया है। उन्होंने कहा कि जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया को क्षेत्र का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने के लिए लिखा जा चुका है और जल्द ही टीम कमांद क्षेत्र का दौरा कर जांच करेगी। उन्होंने बताया कि यदि क्षेत्र में भारी बारिश होती है तो ऐहतियातन ग्रामीणों के ठहरने के लिए नजदीकी स्कूल और पंचायत घर में व्यवस्था की गई है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

कमांद गांव में भू-स्खलन की चपेट में आए ग्रामीणों के खेत। संवाद

कमांद गांव में भू-स्खलन की चपेट में आए ग्रामीणों के खेत। संवाद

कमांद गांव में भू-स्खलन की चपेट में आए ग्रामीणों के खेत। संवाद

कमांद गांव में भू-स्खलन की चपेट में आए ग्रामीणों के खेत। संवाद

कमांद गांव में भू-स्खलन की चपेट में आए ग्रामीणों के खेत। संवाद

कमांद गांव में भू-स्खलन की चपेट में आए ग्रामीणों के खेत। संवाद

कमांद गांव में भू-स्खलन की चपेट में आए ग्रामीणों के खेत। संवाद

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