रोहड़ू। नगर परिषद रोहड़ू के वार्ड नंबर-नौ से सटे पलकन गांव में 16 कायल और चीड़ के पेड़ों की कथित अवैध कटाई ने वन विभाग और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। वर्षों तक गांव वालों ने बंजर पहाड़ी को अपने श्रम और पहरेदारी से हरा-भरा बनाया, उसे एक ही दिन में मशीनों और आरी से साफ कर दिया। इसपर ग्रामीणों में रोष है। ग्रामीण इसे केवल पेड़ों की कटाई नहीं, बल्कि सरकारी संरक्षण में हरियाली की हत्या बता रहे हैं। ग्रामीण मनोज, बलदेव, राजिंद्र, हरप्रीत और प्रेम राज ने बताया कि कभी बंजर रही इस पहाड़ी पर गांव के लोगों ने पौधे लगाए। पहाड़ी पर लगाए पौधों को वर्षों तक संभाला और आग से बचाने के लिए कई बार आधी-आधी रात तक पहरा दिया। उनका कहना है कि जिस जंगल को तैयार करने में ग्रामीणों ने वर्षों मेहनत की, उसे कुछ घंटों में उजाड़ दिया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि घटनास्थल से करीब दो किलोमीटर दूरी पर डीएफओ कार्यालय और वन परिक्षेत्र कार्यालय होने के बाद इतनी बड़ी कटाई आखिर किसकी निगरानी में हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि सौर ऊर्जा परियोजना के नाम पर सरकारी भूमि उपलब्ध करवाते समय वन विभाग और राजस्व विभाग ने आंखें मूंद लीं। यदि मौके का निरीक्षण हुआ था, तो हरे-भरे कायल और चीड़ के पेड़ों के बीच परियोजना को अनुमति कैसे दी गई।ग्रामीणों ने कहा कि विभाग अब लकड़ी कब्जे में लेकर कार्रवाई का दिखावा कर रहा है, जबकि असली सवाल यह है कि पेड़ कटने से पहले जिम्मेदार अधिकारी कहां थे। लोगों का आरोप है कि जमीन की रिपोर्ट तैयार करते समय वास्तविक स्थिति को छिपाया गया। यदि क्षेत्र में घना हरित आवरण मौजूद था, तो उसे खाली भूमि कैसे दर्शाया गया।
ग्रामीणों की चेतावनी, उच्च न्यायालय में उठाएंगे मामला
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि मामले को प्रदेश उच्च न्यायालय में उठाया जाएगा। उनका कहना है कि यदि आज पलकन की इस पहाड़ी बचाने के लिए आवाज नहीं उठी, तो आने वाले समय में विकास परियोजनाओं के नाम पर पहाड़ों की हरियाली इसी तरह खत्म होती जाएगी। लोगों का कहना है कि यह घटना अब केवल 16 पेड़ों की कटाई का मामला नहीं रह गई है, बल्कि यह सवाल बन चुकी है कि आखिर पर्यावरण बचाने के सरकारी दावे जमीन पर कितने खोखले हैं। वहीं, डीएफओ रवि शंकर शर्मा कार्रवाई करने का आश्वासन दे रहे हैं। उन्होंने मौके से काटे गए पेड़ोंं की लकड़ी को उठवाकर कब्जे में ले लिया है, लेकिन अभी तक इसमें आगे कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।