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Rampur Bushahar News: देश के आखिरी गांव छितकुल की जानी संस्कृति, विश्व के सबसे ऊंचे डाकघर से घरों को भेजी चिट्ठियां

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स्पीति की हिक्किम मोनास्ट्री पहुंचे बिहार और उत्तर प्रदेश के युवा। संवाद
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विकसित भारत वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम-2026 के तहत हिमाचल के सीमावर्ती क्षेत्रों का भ्रमण कर रहे बाहरी राज्यों के युवा
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किन्नौर और स्पीति के गांवों में पहुंचकर संस्कृति और जीवनशैली से हो रहे रूबरू
संवाद न्यूज एजेंसी

रिकांगपिओ, काजा । विकसित भारत वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम-2026 के तहत बाहरी राज्यों के युवाओं को हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों का भ्रमण करवाया जा रहा है। यह भ्रमण माय भारत और आईटीबीपी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। युवाओं का यह दल किन्नौर और लाहौल-स्पीति के सीमावर्ती क्षेत्र के गांवों की संस्कृति से रूबरू हो रहा है और वहां की जीवनशैली को जान रहा है। मंगलवार को उत्तर प्रदेश और बिहार के 25 युवाओं के दल ने स्पीति घाटी का भ्रमण किया। इस दौरान युवाओं ने विश्व के सबसे ऊंचे डाकघर हिक्किम का भ्रमण किया। यहां से उन्होंने अपने घरों को पत्र भेजे। उन्होंने प्रधानमंत्री और अन्य गणमान्यों को भी पत्र लिखे। वहीं, किन्नौर जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों के भ्रमण के लिए निकले युवाओं के दल ने भारत-चीन अधिकृत तिब्बत सीमा के पास स्थित भारत के आखिरी गांव छितकुल का भ्रमण किया। यहां पहुंचकर युवाओं ने क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर और प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव किया। छितकुल पहुंचने पर युवा दल ने यहां के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक मां महाकाली मंदिर के दर्शन किए। सभी युवाओं ने मंदिर परिसर में सामूहिक रूप से हाथ जोड़कर देश की सुख-समृद्धि और अखंडता के लिए प्रार्थना की। भ्रमण के दौरान किन्नौर जिला पहुंचे विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व कर रहे इन 100 प्रतिभागियों को लापचा एवं शिपकी ला के शैक्षणिक भ्रमण पर ले जाया गया, जहां उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्र के सामरिक महत्व, भौगोलिक विशेषताओं तथा सांस्कृतिक विरासत के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। इन युवाओं को शलखर एवं लियो गांवों के स्थानीय पारंपरिक विवाह समारोह में शामिल होने का दुर्लभ अवसर प्राप्त हुआ। इस दौरान उन्होंने किन्नौरी समुदाय की समृद्ध परंपराओं, रीति-रिवाजों एवं जीवंत सांस्कृतिक विरासत को निकट से देखा और सराहा। प्रतिभागियों ने स्थानीय बाग-बगीचों का भी भ्रमण किया, जहां उन्होंने किसानों के साथ संवाद स्थापित कर पारंपरिक बागवानी पद्धतियों, स्थानीय खेती तकनीकों तथा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में बागवानी आधारित आजीविका के महत्व को समझा। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने कार्यक्रम के सफल संचालन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका जारी रखते हुए सभी प्रतिभागियों के लिए दोपहर के भोजन एवं हाई-टी सहित आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराईं।
छितकुल में महाकाली मंदिर के दर्शन किए
सांगला (किन्नौर)। विकसित भारत वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत मंगलवार को युवाओं का एक दल भारत-चीन अधिकृत तिब्बत सीमा के पास स्थित भारत के आखिरी गांव छितकुल पहुंचा। यहां पहुंचकर युवाओं ने क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर और प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव किया। छितकुल पहुंचने पर युवा दल ने यहां के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक मां महाकाली मंदिर के दर्शन किए। सभी युवाओं ने मंदिर परिसर में सामूहिक रूप से हाथ जोड़कर देश की सुख-समृद्धि और अखंडता के लिए प्रार्थना की। युवाओं ने बताया कि इस विशेष कार्यक्रम के तहत हमारा चयन होना बेहद गौरव की बात है। हम यहां भारत की असली खूबसूरती, विविधता और देश की अखंडता को करीब से देखने और महसूस करने आए हैं। हमारा यह सफर यहीं नहीं रुकेगा, इसके बाद हम आगे पहाड़ों की ऊंचाइयों पर जाकर सीमावर्ती क्षेत्रों के जीवन को और करीब से समझेंगे। इस अनूठे अवसर के लिए युवाओं के दल ने माइ भारत युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय और गृह मंत्रालय सहित संबंधित मंत्रियों का आभार व्यक्त किया।
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हिक्किम मोनास्ट्री और म्यूजियम का किया दौरा
काजा (लाहौल-स्पीति)। स्पीति घाटी के भ्रमण के दौरान युवाओं का दल सबसे पहले लंगजा गांव पहुंचा। लाहौल-स्पीति के जिला युवा अधिकारी कुल्लू एवं अतिरिक्त प्रभारी प्रतिभा शर्मा और प्रदीप कुमार ने बताया कि लंगजा गांव के भ्रमण के बाद दल ने हिक्किम मोनास्ट्री और म्यूजियम का दौरा किया। प्रतिभागियों ने विश्व के सबसे ऊंचे डाकघर हिक्किम का भी भ्रमण किया। यहां से उन्होंने अपने घरों को पत्र भेजे। इसके बाद सभी कीह मॉनेस्ट्री पहुंचे। अंत में दल ने मशहूर चीचम ब्रिज का दौरा किया।
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