खनेरी अस्पताल में एक माह से ठप पड़ी अल्ट्रासाउंड सुविधा
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गर्भवती महिलाओं को निशुल्क उपचार देने के दावों की निकली हवा
निजी संस्थानों में अल्ट्रासाउंड के 800 से 2000 रुपये देने को मजबूर मरीज
अस्पताल में हर माह होते हैं 250 से अधिक प्रसव
सुभाष सेन
रामपुर बुशहर। चार जिलों के मुख्य अस्पताल खनेरी में सरकार और स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी मरीजों पर भारी पड़ रही है। अस्पताल में तैनात रेडियोलॉजिस्ट एक माह से अवकाश पर हैं, जिससे अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा ठप पड़ी है। मरीजों को निजी संस्थानों में जाकर अधिक राशि खर्च कर अल्ट्रासाउंड और टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं। ऐसे में सरकार की गर्भवती महिलाओं को निशुल्क प्रसव की सुविधा देने के दावे भी हवा होते दिख रहे हैं। क्षेत्र के लोगों में सरकार और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर खासा रोष है। महात्मा गांधी खनेरी अस्पताल में प्रदेश के शिमला, कुल्लू, किन्नौर और मंडी जिले के दुर्गम क्षेत्रों से हजारों लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं।
अस्पताल में तैनात एकमात्र रेडियोलॉजिस्ट 13 मई से छुट्टी पर है, जिससे अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सुविधा ठप पड़ी है। रोजाना 1200 की ओपीडी वाले इस अस्पताल में हर महीने 250 से अधिक प्रसव होते हैं, जबकि हजारों महिलाएं अपनी जांच के लिए अस्पताल पहुंचती हैं। शिमला के कमला नेहरू अस्पताल के बाद खनेरी अस्पताल प्रदेश में सबसे अधिक प्रसव करवाने वाला दूसरा बड़ा अस्पताल है। सरकार की ओर से गर्भवती महिलाओं को निशुल्क प्रसव और स्वास्थ्य जांच की सुविधा दी जा रही है, लेकिन खनेरी अस्पताल पहुंचने वाली महिलाओं को निजी संस्थानों में जाकर अल्ट्रासाउंड करवाने पड़ रहे हैं। अस्पताल में जहां यह सुविधा निशुल्क मिलती है, वहीं निजी संस्थानों में अल्ट्रासाउंड के 800 से 2000 रुपये तक देने पड़ रहे हैं। दूसरे मरीजों को भी अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए निजी क्लीनिकों की दौड़ लगानी पड़ रही है। ऐसे में सबसे अधिक परेशानी गरीब तबके के मरीजों को पेश आ रही है। कुल्लू, किन्नौर और रामपुर के दूरदराज के इलाकों से अस्पताल पहुंचने वाले मरीज स्वास्थ्य लाभ की आस में यहां पहुंचते हैं, लेकिन यहां पहुंचकर उनकी आस मायूसी में बदल जाती है।
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खनेरी अस्पताल में तैनात रेडियोलॉजिस्ट के अवकाश पर जाने से अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा बंद पड़ी है। इस संबंध में सरकार को सूचना भेजी गई है। उम्मीद है कि जल्द ही रेडियोलॉजिस्ट अस्पताल में अपनी तैनाती देंगे। डॉ. रोशन कौंडल, एमएस, खनेरी अस्पताल
बजट के बावजूद दुरुस्त नहीं हो पा रहा ऑक्सीजन प्लांट
अस्पताल में मरीजों को ऑक्सीजन की सुविधा देने के लिए करोड़ों की लागत से ऑक्सीजन प्लांट तो स्थापित किया, लेकिन सात माह से भी अधिक समय से यह प्लांट तकनीकी खामी के कारण बंद पड़ा है। अस्पताल की रोगी कल्याण समिति ने प्लांट को दुरुस्त करने के लिए साढ़े छह लाख रुपये की राशि भी स्वीकृत की है। इसके बावजूद प्लांट अब तक शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन भद्राश स्थित निजी प्लांट से ऑक्सीजन खरीदकर मरीजों को उपलब्ध करवा रहा है, जिससे सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। अस्पताल का अपना प्लांट यदि दुरुस्त होता है, तो प्रशासन को बाहर से ऑक्सीजन खरीदने की जरूरत नहीं रहेगी। अब प्लांट 20 जून तक दुरुस्त होने की उम्मीद है।
खनेरी अस्पताल में एक माह से ठप पड़ी अल्ट्रासाउंड सुविधा। संवाद