संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। देवभूमि हिमाचल अपनी देव संस्कृति के लिए देश-दुनिया में जाना जाता है। यहां देव संस्कृति से जुड़ी कई परंपराएं और पर्व आज भी कायम हैं। हजारों ग्रामीणों की अपने देवी-देवताओं में अपार आस्था है। देव संस्कृति का परिचायक रामपुर उपमंडल की शलाटी घोड़ी में आयोजित होने वाला ऐतिहासिक शाड़ का जातर मेला 20 जून से शुरू होगा। इससे पूर्व देवता अपने अधिकार क्षेत्रों के तहत आने वाले गांवों में जाकर लोगों को आशीर्वाद देंगे। इस दौरान ग्रामीण ढोल-नगाढ़ों की थाप पर झूमते हुए देवता का स्वागत करेंगे। रामपुर के साथ लगती भड़ावली पंचायत के गांवों में एक सप्ताह तक शाड़ का जातर मेला आयोजित होगा। मेले से पूर्व क्षेत्र के आराध्य देवता नरेशर लक्ष्मी नारायण कुमसू शलाटी घोड़ी के भ्रमण पर निकल गए हैं। शलाटी घोड़ी के तहत आने वाले विभिन्न गांव के लोग इस मेले और अपने आराध्य देवता का वर्ष भर बेसब्री से इंतजार करते हैं। शलाटी घोड़ी में देवता साहिब लक्ष्मी नारायण कुमसू की अगुआई में विभिन्न गांव में मेला सजता है। देवता साहिव के भ्रमण का पहला पड़ाव खखरोला गांव है। सोमवार को देवता इस गांव से निकलकर अपने कार करिंदों के साथ राजपुरा गांव पहुंचे, जहां ग्रामीणों ने पूजा-अर्चना कर देवता का भव्य स्वागत किया। देवता का रात्रि विश्राम गटोल गांव में हुआ। अब मंगलवार को देवता करेरी, बुधवार को रसेंदली गांव पहुंचेंगे। वीरवार को देवता के मसारना गांव पहुंचते ही शाड़ के जातर मेले का शुभारंभ होगा। यहां ग्रामीण देररात तक ढोल-नगाढ़ों की थाप पर पारंपरिक नृत्य पेश करेंगे। इसके बाद देवता साहिब नरेशर लक्ष्मी नारायण जी छलावट, कमलाऊ और भड़ावली गांव में भी मेला सजाएंगे। उसके बाद के चार दिन तक नोगली में देवता साहिब के सानिध्य में जिला स्तरीय नोगली मेला शुरू होगा, जहां क्षेत्र के विभिन्न देवी देवता मेले की शोभा बढ़ाएंगे।
कुमसू मंदिर कमेटी अध्यक्ष जीवन चौहान ने बताया कि देवता साहिब शलाटी घोड़ी के भ्रमण पर निकल चुके हैं। आगामी सात दिनों तक देवता विभिन्न गांव जाकर ग्रामीणों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देंगे। देव आगमन पर विभिन्न गांव में पारंपरिक मेला सजेगा।