ठियोग (रामपुर बुशहर)। जिला शिमला और सोलन के प्रमुख देवता डोमेश्वर सन्नाटा 400 से अधिक जात्रों (यात्राओं) को पूरा करने के बाद अपने मंदिर में प्रवेश करने की परंपरा का रविवार को निर्वहन करेंगे।
इस दौरान तीन दिवसीय उत्सव का आगाज भी होगा। सदियों से देव परंपरा के अनुसार मनाए जाने वाले इस उत्सव को बढ़ातर कहा जाता है, जोकि 21 से 23 मई तक चलेगा। इस उत्सव में 21 देवताओं की पूजा होगी, जिसमें प्रदेश की प्राचीन 18 रियासतों के शाही परिवार 23 साल बाद देवता महाराज की गुठाण देवठी में शिरकत लेंगे।
यह कार्यक्रम देवता के प्रमुख मंदिर में चार सालों बाद प्रवेश करने की खुशी में मनाया जा रहा है। कोरोना के चलते यह उत्सव नहीं हो पाया था, जिस कारण देवता महाराज अपने प्रमुख मंदिर में विराजमान नहीं हो पाए थे। इस वर्ष यह उत्सव आयोजित किया जा रहा हैं, जिसमें देवरथ के 21 टीकों (देवता) पारंपरिक देव नृत्य चोल्टू आयोजित किया जाएगा।
देवठी के प्रमुख कारदार मदन वर्मा ने बताया कि समारोह के लिए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की सहायता ली जा रही है। अतिरिक्त 50 जवानों की तैनाती की है।
कौन कौन सी रियासतें होंगी शामिल
देव परंपरा से जुड़े इस उत्सव में 18 ठकुराइयों के शाही परिवार शामिल होंगे, जिनमें क्योंथल, दरकोटी, कोटखाई, कुठार सेर सोलन, घूंड, ठियोग, करांगला, शिला सहित अन्य रियासतें भी शामिल हैं। उत्सव में डोमेश्वर गुठाण में मान्यता रखने वाले सात खूंद भी शामिल रहेंगे। देवता के रथ पर 21 टीकों देवताओं की पूजा की जाएगी। इसके अलावा डोमेश्वर पुडग, शडी से माहेश्वरी देवी, नाग देवता बागी, नाग देवता बासा माहोग, हिमरी, नेहरा कोटखाई, नेहरा ठियोग, नमाणा, दवां और रावाग के डोमेश्वर देवता आमंत्रित किए गए हैं।